तारीख पर तारीख...ऐसे तो ₹23000 करोड़ के प्रोजेक्‍ट का हो जाएगा बंटाधार

3 weeks ago

Last Updated:August 04, 2025, 07:57 IST

Indian Navy Submarine Project: भारत जमीन से लेकर आसमान और समंदर तक में अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है. इसके बावजूद नेशनल डिफेंस के लिहाज से कुछ संवेदनशील प्रोजेक्‍ट में लगातार ...और पढ़ें

तारीख पर तारीख...ऐसे तो ₹23000 करोड़ के प्रोजेक्‍ट का हो जाएगा बंटाधारडीजल ऑपरेटेड पनडुब्बियों को अपग्रेड कर उन्‍हें स्‍टील्‍थ बनाने के प्रोजेक्‍ट में देरी से कॉम्‍बैट कैपेबिलिटी पर बुरा प्रभाव पड़ने का खतरा गहरा गया है.

हाइलाइट्स

AIP सिस्‍टम की देरी से पनडुब्बियों की क्षमता हो रही प्रभावितभारत की स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में स्टील्थ क्षमता की कमीपाकिस्तान AIP से लैस सबमरीन से अपनी क्षमता बढ़ा रहा

नई दिल्‍ली. भारत ने अपनी नवीनतम स्कॉर्पीन या कलवरी क्लास पारंपरिक पनडुब्बियों की पानी के भीतर ऑपरेशन और स्‍टील्‍थ कैपेबिलिटी बढ़ाने के मामले में नया और चौंकाने वाला अपडेट आया है. डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्‍बी (Conventional Submarine) को अपग्रेड करने का एक और मौका गंवा दिया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्‍टम अब भी तैयार नहीं है, जिस कारण इसे इन पनडुब्बियों में इंटीग्रेट नहीं किया जा सका है. इस वजह से इस क्‍लास की पनडुब्बियां स्‍टील्‍थ कैपेबिलिटी से लैस नहीं हैं. इसका मतलब यह हुआ कि ये सबमरीन दुश्‍मनों के टारगेट पर आसानी से आ सकती हैं.

मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड (MDL) में फ्रांसीसी सहयोग से बनी पहली स्कॉर्पीन पनडुब्बी INS Kalvari (जो दिसंबर 2017 में नौसेना में शामिल हुई थी) वर्तमान में मुंबई में अपने रखरखाव रिफिट से गुजर रही है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने जानकारी दी है कि उसमें AIP प्लग लगाने की योजना टाल दी गई है, क्योंकि DRDO की AIP प्रणाली अब भी ऑपरेशनल रूप से तैयार नहीं है. सूत्रों के अनुसार, ‘DRDO की नेवी मैटेरियल्‍स रिसर्च लैब (Naval Materials Research Lab) द्वारा एल&टी के साझेदारी में विकसित ईंधन सेल आधारित AIP सिस्टम उम्मीद है कि 2026 के मध्य तक INS Khanderi की अगली नियमित रिफिट तक तैयार हो जाएगा.’

प्रोजेक्ट-75 के तहत बनी छह स्कॉर्पीन पनडुब्बियां

भारतीय नौसेना ने प्रोजेक्ट-75 के तहत कुल छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्कॉर्पीन पनडुब्बियां शामिल की हैं, जिन्हें मझगांव डॉक द्वारा फ्रांसीसी ‘नेवल ग्रुप’ के सहयोग से बनाया गया है. इसमें INS Vagsheer को इस वर्ष जनवरी में नौसेना में शामिल किया गया. इस प्रोजेक्ट की लागत 23,000 करोड़ रुपये से अधिक है. हालांकि, इन सबमरीन में स्‍टील्‍थ क्षमता न होने की वजह से इनके दुश्‍मनों की जद में आने का खतरा काफी ज्‍यादा है.

AIP परियोजना में सालों की देरी

‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, AIP प्रणाली को 2014 में 270 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति मिली थी और इसे जून 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब तक यह प्रणाली पूरी तरह तैयार नहीं हो सकी है. 23 जुलाई को ही MDL और फ्रांसीसी नेवल ग्रुप के बीच AIP प्लग को स्कॉर्पीन पनडुब्बियों में एकीकृत करने के लिए समझौता हुआ है. इसके तहत पनडुब्बियों में ‘जम्बोइजेशन’ नामक जटिल प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें पतवार (हुल) को काटकर AIP प्लग लगाया जाएगा और फिर से संरचना को जोड़कर उसे संचालन योग्य बनाया जाएगा.

…ऐसे तो पाकिस्‍तान निकल जाएगा आगे

जहां न्यूक्लियर पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं, वहीं डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को हर कुछ दिनों में सतह पर आना होता है. AIP प्रणाली इस आवश्यकता को लगभग दो सप्ताह तक टाल सकती है, जिससे पनडुब्बियों की गुप्तता और युद्ध क्षमता में भारी वृद्धि होती है. चीन की मदद से पाकिस्तान आठ हांगोर-क्लास AIP युक्त पनडुब्बियां शामिल करने की प्रक्रिया में है, जिससे उसकी क्षमता में बड़ा इजाफा होगा. इसके उलट भारत की पारंपरिक पनडुब्बी लगातार कमजोर होती जा रही है. वर्तमान में भारत के पास 6 स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के अलावा सात पुरानी रूसी किलो-क्लास और चार जर्मन HDW पनडुब्बियां हैं.

भविष्य की योजनाएं भी अधर में

भारत की तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों को 38,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाने और छह नई पीढ़ी की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को 70,000 करोड़ रुपये की लागत से AIP और लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों के साथ तैयार करने की योजनाएं भी अभी तक अंतिम रूप नहीं ले सकी हैं. भारत की पनडुब्बी युद्धक क्षमता में तेजी से बदलाव की आवश्यकता है, खासकर जब पड़ोसी देश इस क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा रहे हैं. AIP परियोजना की देरी इस रणनीतिक क्षेत्र में भारत की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

August 04, 2025, 07:52 IST

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