Last Updated:August 05, 2025, 11:59 IST
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी. ट्रंप के इस बयान पर कार्ति चिदंबरम ने सरकार से राष्ट्रहित में फैसला लेने को कहा. कांग्रेस सांसद का यह बयान पार्टी लाइन से हटकर केंद...और पढ़ें

हाइलाइट्स
डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी.ट्रंप के इस बयान पर कार्ति चिदंबरम ने सरकार से राष्ट्रहित में फैसला लेने को कहा.कांग्रेस सांसद का यह बयान पार्टी लाइन से हटकर सरकार के समर्थन में दिख रहा है.भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस (INC) के भीतर एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है. शशि थरूर, मनीष तिवारी और अब कार्ति चितंबरम जैसे वरिष्ठ नेता पार्टी लाइन से हटकर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहे हैं. इस बीच, कार्ति चितंबरम का हालिया बयान ने पार्टी में एक नई बहस छेड़ दी है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के भीतर ही कुछ नेता राहुल गांधी की रणनीति से असहमति जता रहे हैं.
कार्ति चितंबरम ने सोमवार रात एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘हमें अपने राष्ट्रीय हित में काम करना चाहिए, न कि आवेगशील राष्ट्राध्यक्षों के चिड़चिड़ाहट भरी बातों से प्रभावित होना चाहिए.’ कार्ति की यह टिप्पणी भारतीय विदेशी सरकार के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें रूस से तेल आयात को लेकर यूरोपीय संघ और अमेरिका की आलोचना का जवाब दिया गया था.
कार्ति का यह पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रहार माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने भारत को रूस से सैन्य और ऊर्जा खरीद के लिए आड़े हाथों लिया था. इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं आईं, जहां कुछ यूजर्स ने इसे ‘राहुल गांधी के नेतृत्व को चुनौती’ करार दिया, तो कुछ ने इसे ‘कांग्रेस में नई सोच’ की शुरुआत बताया.
‘पार्टी हित से पहले राष्ट्रहित’
इससे पहले, शशि थरूर और मनीष तिवारी ने भी राष्ट्रीय हित को पार्टी हित से ऊपर रखने की बात कही थी. शशि थरूर ने हाल के दिनों में कई बार भारत की विदेश नीति की तारीफ करते दिखे हैं. उन्होंने रूस और अमेरिका के साथ संतुलित रिश्तों की वकालत की है. इसी तरह, मनीष तिवारी ने संसद में एक चर्चा के दौरान कहा कि भारत को अपनी स्वायत्तता बनाए रखते हुए वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति अपनानी चाहिए, भले ही यह पार्टी के कुछ नेताओं की राय से मेल न खाए.
राहुल गांधी की अलग ही राह
कांग्रेस के इन नेताओं का बयान राहुल गांधी की बातों के उलट प्रतीत होती है. पहलगाम हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक… राहुल गांधी केंद्र की नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल खड़े करते रहे हैं. इस पहले डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और रूस को ‘डेड इकॉनमी’ कहा था, तब भी इस पर राहुल गांधी की प्रतिक्रिया पर कई प्रश्न उठे थे. राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप की इस बात को सही ठहराते हुए भारत की अर्थव्यवस्था को मृत करार दिया था. उनके इस बयान की खूब आलोचना हुई थी.
ऐसे में शशि थरूर, मनीष तिवारी और अब कार्ति चितंबरम का राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का रुख कांग्रेस में एक नई बहस छेड़ सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी इस बदलाव को स्वीकार करेंगे या वे इसे अपने नेतृत्व के लिए चुनौती मानेंगे. पार्टी के लिए यह समय आत्ममंथन का है. क्या वह राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाएगी या अपनी आंतरिक एकता को प्राथमिकता देगी? आने वाले दिनों में ही इस सवाल का जवाब साफ हो सकेगा कि क्या राहुल गांधी नाराज होंगे या वे इस नई सोच को अपनाएंगे.
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...और पढ़ें
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T...
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Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
August 05, 2025, 11:59 IST