Last Updated:April 04, 2025, 22:16 IST
Gujarat: वडोदरा पुलिस ने मेदा गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया, जो छह महीने में गुजरात के 22 मंदिरों में चोरी कर चुके थे. आरोपियों से नकदी, जेवर, मूर्तियां और चोरी की बाइक्स बरामद हुई हैं.

मंदिर में दान पेटी चुरा ले गए चोर
पिछले कुछ महीनों से वडोदरा, भायली, कर्जन, भरूच, राजकोट और जेतपुर जैसे इलाकों में लगातार मंदिरों में चोरी की घटनाएं सामने आ रही थीं. इन वारदातों से लोगों के बीच डर और नाराजगी दोनों फैल गए थे. वडोदरा क्राइम ब्रांच ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और आखिरकार एक बड़ी सफलता हाथ लगी.
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच से मिली अहम सुराग
क्राइम ब्रांच की टीम ने इलाके के कई मंदिरों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले. तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचना के आधार पर दो संदिग्धों की गतिविधियां जांच के दायरे में आईं. जब इनकी लोकेशन हलोल से सूरत की ओर जाते हुए मिली, तो पुलिस ने तुरंत गोल्डन चोकड़ी के पास निगरानी बिठा दी और तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया.
तीनों आरोपी दाहोद के रहने वाले
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम हैं उमेश मेड़ा (25), अजय मेड़ा (23) और गोविंद दलबीरभाई मच्छर (23). तीनों दाहोद जिले के रहने वाले हैं. इनकी तलाशी के दौरान पुलिस को सात मोबाइल फोन, 10 हजार रुपये नकद, 2.02 लाख रुपये कैश, सोने-चांदी की सिल्लियां, भगवान की मूर्तियां और मंदिरों से चुराई गई अन्य धार्मिक वस्तुएं बरामद हुईं.
छह महीनों में 22 मंदिरों को बनाया निशाना
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे मेदा गिरोह के सक्रिय सदस्य हैं और पिछले छह महीनों में राज्य भर के 22 मंदिरों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं. ये मंदिर ज्यादातर सुनसान इलाकों में या हाईवे के किनारे स्थित थे, जिन्हें रात में आसानी से लूटा जा सकता था.
दान पेटी में सिक्का डालकर करते थे अंदाज़ा
इस गिरोह का तरीका बेहद चौंकाने वाला था. ये लोग मंदिर में पहले पूजा करने का बहाना करते थे और दान पेटी में एक सिक्का डालते थे. आवाज़ सुनकर अंदाज़ा लगाते थे कि पेटी में कितनी रकम हो सकती है. इसके बाद वो दिन में रेकी करते और रात में मंदिरों को निशाना बनाते थे.
चोरी के लिए मोटरसाइकिल का इस्तेमाल
चोरी को अंजाम देने के लिए ये लोग चोरी की मोटरसाइकिल से शहर में घुसते थे. मंदिर की रेकी के बाद ये बाइक को किसी पुल के नीचे छिपा देते और दूसरी बाइक से भाग निकलते. ये पूरी वारदात इस तरह करते थे कि कोई उन्हें पहचान न सके.
परिवार तक सीमित था गैंग, ताकि रह सके गुप्त
गिरोह में केवल परिवार के सदस्य और करीबी रिश्तेदार ही शामिल थे. इसका कारण था कि किसी बाहरी व्यक्ति पर भरोसा न करना पड़े और गुप्तता बनी रहे. इससे पुलिस को चकमा देने में उन्हें आसानी होती थी.
तीनों पर पहले से दर्ज हैं कई आपराधिक मामले
तीनों आरोपियों पर पहले से ही कई आपराधिक केस दर्ज हैं. अजय पर भरूच और सूरत ग्रामीण में चार मामले, उमेश पर दाहोद, गांधीनगर, सूरत और भरूच में छह मामले, जबकि गोविंद पर सूरत, दाहोद और गांधीनगर में तीन मामले दर्ज हैं. फिलहाल पुलिस तीनों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह में और कौन-कौन शामिल है.
First Published :
April 04, 2025, 22:16 IST