Last Updated:August 05, 2025, 12:44 IST
Nitish Kumar New Game Plan in Bihar: बिहार चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार की महिला केंद्रित योजनाएं, जैसे आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी सेविकाएं, जीविका दीदियां, महिला शिक्षिका को आरक्षण और नर्सों की नियुक्तियां जैसे ...और पढ़ें

हाइलाइट्स
नीतीश कुमार की महिला केंद्रित योजनाएं बिहार चुनाव में बढ़त दिला सकती हैं.आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी सेविकाओं का मानदेय बढ़ाया गया.TRE-4 शिक्षक भर्ती में 35% महिला आरक्षण लागू.पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सीएम नीतीश कुमार के तरकश से एक से बढ़कर एक तीर निकल रहे हैं. यह तीर न केवल महागठबंधन को घायल कर रहा है, बल्कि बीजेपी के अरमानों को भी रौंद रहा है. नीतीश का टी-20 अंदाज में ताबड़तोड़ बैटिंग ने आरजेडी के सीएम फेस तेजस्वी यादव को अब मुद्दाविहीन कर दिया है. नीतीश अपनी ‘खामोश रणनीति’ से न केवल अपने परंपरागत पुराने वोट बैंक को फिर से साध रहे हैं, बल्कि एनडीए में भी अपनी स्थिति को और मजबूत कर रहे हैं. इससे एलजेपी (रामविलास) के सुप्रीमो चिराग पासवान सहित सीएम बनने की आस बैठे बीजेपी के कई नेताओं के अरमानों का कत्ल हो रहा है. बिहार में आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी सेविकाएं, जीविका दीदियों, महिला शिक्षकों और नर्सों को लेकर हाल के दिनों में कई घोषणाएं हुई हैं. नीतीश के लोकलुभावन घोषणाएं बिहार में एक बार फिर से महिलाओं के बीच उन्हें पहली पसंद बना दे तो हैरानी नहीं होगी. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या नीतीश अपने पुराने वोट बैंक को बिहार चुनाव 2025 में फिर से हासिल कर लेंगे, जिसके बल पर वह बीते 20 सालों से बिहार में राज कर रहे हैं?
बिहार में नीतीश की सियासी ताकत का आधार रही हैं महिलाएं. बिहार में कुल वोटर्स में से तकरीबन 3.11 करोड़ वोटर यानी 46% मतदाता महिला हैं. 2010 में महिलाओं ने 54.5% और पुरुषों 53% से अधिक वोट की तो नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 115 सीटें जीती. नीतीश कुमार की शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायतों में 50% महिला आरक्षण अहम रहे. इसके साथ ही सीएम नीतीश ने जीविका योजना के जरिए 1.4 लाख दीदियों के जरिए 3 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को जोड़ा, जिसने नीतीश को ईबीसी और दलित महिलाओं का समर्थन दिलाया. उनकी हाल में ‘महिला संवाद’ रथ पहल ने भी महिलाओं को सशक्तिकरण योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया.
क्या फिर महिलाओं के बीच नायक बन रहे हैं नीतीश?
हालांकि, 2020 में जेडीयू का प्रदर्शन 43 सीटें और 15.39% वोट प्रतिशत तक सिमट कर रह गया. तेजस्वी यादव के युवा केंद्रित अभियान ने नीतीश के वोट बैंक में सेंध लगाई. अब नीतीश आशा वर्कर्स, आंगनबाड़ी सेविकाओं, जीविका दीदियों, महिला शिक्षिकों और नर्सों को बढ़े हुए मानदेय और डोमिसाइल नीति के जरिए फिर से लुभाने में जुटे हैं. नीतीश सरकार ने 2005 से 2025 तक कई क्षेत्रों में भर्तियां और मानदेय वृद्धि के जरिए अपने वोट बैंक को मजबूत किया. आइए नीतीश की प्रमुख महिला सेंट्रिक योजनाओं के आंकड़े पर नजर डालते हैं.
आशा वर्कर्स
बिहार में 80,000 आशा कार्यकर्ताएं हैं. 30 जुलाई 2025 को नीतीश ने उनकी प्रोत्साहन राशि को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया. ममता कार्यकर्ताओं को 20,000 का मानदेय प्रति प्रसव 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये किया गया. यह ग्रामीण महिलाओं और ईबीसी समुदाय में नीतीश की छवि को बिहार चुनाव में मजबूत कर सकता है.
आंगनबाड़ी सेविकाएं
बिहार में 1 लाख 20 हजार आंगनबाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं काम कर रही हैं. इन सबों की नियुक्तियां नीतीश राज में हुई हैं. अब इनके मानदेय को 2024 में 6,000-8,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000-15,000 रुपये कर दिया गया है, जो नीतीश का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है.
जीविका दीदियां
बिहार में 1 लाख 40 हजार जीविका दीदियों के जरिए 3-3.5 करोड़ लोग अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हैं. 2025 में उनके लिए लोन ब्याज में कटौती और प्रशिक्षण योजनाएं शुरू की गईं. इससे लाखों महिलाएं लाभ ले रही हैं.
महिला शिक्षक और नर्स
बिहार में TRE-4 के तहत 70,000 शिक्षक पदों की भर्ती में 35% महिला आरक्षण लागू है, जिससे 26,425 महिलाओं को नौकरी मिल सकती है. संविदा और आउटसोर्सिंग नौकरियों में भी 35% आरक्षण से 52,500 महिलाओं को फायदा होगा. नर्स भर्तियों में 2020-25 के बीच 15,000 महिलाएं नियुक्त हुईं कुल मिलाकर, 79,000 महिलाओं को इन भर्तियों से लाभ मिलेगा.
नीतीश के इन कदमों से राज्य में 61.16 लाख सीधे लाभान्वित हुए, जो बिहार के 6-7% वोटर बेस को प्रभावित करते हैं. 4 अगस्त 2025 को नीतीश ने शिक्षक भर्ती (TRE-4 और TRE-5) में डोमिसाइल नीति लागू करने की घोषणा की, जिसके तहत बिहार के निवासियों को प्राथमिकता मिलेगी. यह तेजस्वी यादव के प्रमुख मुद्दे को हाईजैक करने की रणनीति थी, जिन्होंने 2020 से डोमिसाइल नीति को बेरोजगारी से जोड़कर प्रचारित किया. इस नीति से 70,000 शिक्षक पदों और अन्य सरकारी नौकरियों में बिहार के युवाओं, खासकर ग्रामीण और EBC समुदायों, को फायदा होगा. डोमिसाइल नीति का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं पर होगा, क्योंकि 35% आरक्षण अब केवल बिहार की महिलाओं के लिए है. इससे नीतीश का महिला वोट बैंक 3.11 करोड़ और मजबूत होगा, जिससे जेडीयू का 2020 में 15.39% वोट शेयर 2025 में डबल हो सकता है.
First Published :
August 05, 2025, 12:44 IST