Last Updated:January 03, 2026, 14:10 IST
बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले नेशनल सिटीजन पार्टी में जबरदस्त उथल-पुथल मची है. जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन के फैसले ने पार्टी को अंदर से तोड़ दिया है.
बांग्लादेश में सियासी भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है. (फोटो: Reuters)Bangladesh News: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है. इसी बीच नेशनल सिटीजन पार्टी यानी एनसीपी एक बड़े संकट में फंसती नजर आ रही है. कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी के साथ चुनावी गठबंधन का फैसला पार्टी के लिए भारी पड़ गया है. इस फैसले के विरोध में एनसीपी के 14 केंद्रीय नेताओं ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी की अंदरूनी कमजोरी खुलकर सामने आ गई है.
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीपी के भीतर लंबे समय से जमात के साथ हाथ मिलाने को लेकर असहमति थी. पार्टी के एक बड़े वर्ग का मानना था कि जमात की विचारधारा एनसीपी की मूल सोच से पूरी तरह अलग है. नेताओं का कहना है कि यह गठबंधन राजनीतिक तौर पर आत्मघाती साबित हो सकता है. इसी नाराजगी ने अब खुले विद्रोह का रूप ले लिया है. स्थिति यह है कि सिर्फ इस्तीफे ही नहीं हुए हैं, बल्कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता चुनावी गतिविधियों से भी दूरी बना चुके हैं.
कई नेता सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों में नजर नहीं आ रहे. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि एनसीपी के भीतर असंतोष अभी और बढ़ सकता है. इस पूरे विवाद के बीच बंगाली अखबार जुगंतोर की एक रिपोर्ट ने नई बहस छेड़ दी है. रिपोर्ट के अनुसार, एनसीपी संयोजक नाहिद इस्लाम के चुनावी हलफनामे में बताई गई आय को लेकर सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जिससे पार्टी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.
एनसीपी की नींव जुलाई 2024 के उन प्रदर्शनों से जुड़ी मानी जाती है, जिनमें छात्र और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए थे. इन प्रदर्शनों में कई लोगों की मौत भी हुई थी और कई घायल हुए थे. अब उन पीड़ित परिवारों में भी नाराजगी दिख रही है. उनका कहना है कि जमात के साथ गठबंधन के बाद से एनसीपी अपने मूल मुद्दों से भटक गई है. जुलाई प्रदर्शनों में मारे गए एक व्यक्ति के परिवार के सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी में हो रही टूट से उनकी मांगें कमजोर पड़ रही हैं.
उनका कहना है कि सरकार ने पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया और अब एनसीपी से भी भरोसा उठता जा रहा है. उनके मुताबिक, पार्टी की साख दिन-ब-दिन गिर रही है. एनसीपी के कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि जमात के साथ गठबंधन का फैसला पार्टी के सिर्फ दो प्रभावशाली नेताओं ने लिया. उनका दावा है कि केंद्रीय नेतृत्व के ज्यादातर लोगों को इस फैसले में शामिल ही नहीं किया गया. यही वजह है कि कई नेता इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ मान रहे हैं.
एक वरिष्ठ नेता ने जुगंतोर से बातचीत में कहा कि उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन पार्टी की गतिविधियों से खुद को अलग कर लिया है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर उन्होंने इस्तीफा दिया, तो केंद्रीय से लेकर जिला स्तर तक बड़े पैमाने पर नेता पार्टी छोड़ सकते हैं.
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है, जब एनसीपी ने कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और कुछ नामों पर चर्चा चल रही है. चौंकाने वाली बात यह है कि घोषित उम्मीदवारों में से कुछ ने भी पार्टी छोड़ दी है. इससे साफ है कि चुनाव से पहले एनसीपी की राह आसान नहीं रहने वाली. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर हालात नहीं संभले, तो यह संकट चुनावी नतीजों पर भी सीधा असर डाल सकता है.
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Anoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें
First Published :
January 03, 2026, 14:10 IST

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