बिहार के मिथिला में BJP के लिए सेटबैक या कमबैक, महागठबंधन कहां दिखा रहा है दम?

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Last Updated:August 31, 2025, 14:22 IST

Times Now JVC Opinion Poll:: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले टाइम्स नाउ-जेवीसी के जनमत सर्वे आया है. सर्वे के मुताबिक, एनडीए 136 सीटों के साथ बिहार की सत्ता में वापसी कर सकती है. इस ओपिनियन पोल में मिथिलांचल में ब...और पढ़ें

बिहार के मिथिला में BJP के लिए सेटबैक या कमबैक, महागठबंधन कहां दिखा रहा है दम?बिहार चुनाव 2025-सर्वे में एनडीए की बंपर जीत, मिथिला में बीजेपी की धमक

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर टाइम्स नाउ-जेवीसी के ओपिनियन पोल सर्वे में एनडीए को 243 सीटों वाली विधानसभा में 136 सीटों के साथ सत्ता में वापसी का प्रबल दावेदार बताया गया है. खासकर मिथिलांचल क्षेत्र में बीजेपी और एनडीए का प्रदर्शन बेहतरीन है और यहां बंपर सीटें मिलने का अनुमान है. सर्वे के अनुसार, मिथिला की 42 में से 31 सीटों पर एनडीए को बढ़त है, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 7 सीटें मिलने का अनुमान है. जन सुराज पार्टी को 1 सीट और 3 सीटों पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. जाहिर है ओपिनियन पोल का यह परिणाम बिहार की सियासत में बड़े बदलाव का संकेत देता है और साफ लग रहा है कि मिथिलांचल में भगवा लहर दौड़ रही है.

बीजेपी की बढ़ती ताकत

टाइम्स नाऊ-जेवीसी के सर्वे के अनुसार, बिहार में बीजेपी को 64 सीटों पर जीत और 17 पर बढ़त के साथ कुल 81 सीटें मिल सकती हैं जो 2020 के 74 सीटों से सात अधिक है. जानकार बता रहे हैं कि एक जहां दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र में हाल की जीत ने बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा दिया है. बीजेपी की रणनीति इस बार ओबीसी और ईबीसी वोट बैंक को मजबूत करने पर केंद्रित रही है. पीएम मोदी की रैलियां बिहार के लिए बजट में विशेष पैकेज और ओबीसी-ईबीसी वोटरों को साधने की रणनीति ने बीजेपी को मजबूत किया है.

कोर वोटरों पर बीजेपी की पकड़

इसके साथ ही बीजेपी की ग्राउंड लेवल पकड़ और मजबूत कैडर बेस का भी प्रभाव साफ-साफ दिख रहा है. मिथिलांचल में हिंदुत्व और विकास के मुद्दों ने बीजेपी को ब्राह्मण और अन्य ऊंची जातियों के बीच लोकप्रिय बनाया है. जबकि, क्षेत्र की पारंपरिक जातीय और धार्मिक समीकरणों को बीजेपी ने हिंदुत्व और विकास के मुद्दों से साधा है. मिथिला जैसे शिक्षित और राजनीतिक रूप से जागरूक क्षेत्र में यह रणनीति काम करती दिख रही है.

मिथिला से भोजपुर तक का हाल

सर्वे की क्षेत्रवार स्थिति देखें एनडीए की मजबूती तिरहुत क्षेत्र में भी है. तिरहुत की 49 में से 35 सीटों पर एनडीए को बढ़त है, जबकि महागठबंधन को 11 सीटें मिल सकती हैं. मगध में महागठबंधन को 24 और एनडीए को 21 सीटें मिलने की संभावना है. भोजपुर में एनडीए और महागठबंधन क्रमशः 24 और 20 सीटों पर हैं, जबकि अंग क्षेत्र में एनडीए 15 सीटों पर आगे है.

सीमांचल में महागठबंधन का दम!

हालांकि, सीमांचल में महागठबंधन को कुछ उम्मीदें हैं, लेकिन पूरे राज्य में तस्वीर उनके पक्ष में नहीं है. सीमांचल की 24 सीटों में एनडीए और महागठबंधन को 10-10 सीटें मिलने का अनुमान है, लेकिन एआईएमआईएम की 3 सीटें खेल बिगाड़ सकती हैं. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि महागठबंधन के पारंपरिक मुस्लिम-यादव समीकरण की धार कम होती दिख रही है. जानकार कहते हैं कि यह स्थिति बीजेपी के लिए राजनीतिक लाभ का अवसर बनती जा रही है.

नीतीश की जदयू की कमजोरी

नीतीश कुमार की जदयू के लिए सर्वे निराशाजनक तस्वीर पेश करता है. वर्ष 2015 में 71 सीटों से 2020 में 43 और अब 31 सीटों का अनुमान जदयू की घटती लोकप्रियता को दर्शाता है. नीतीश कुमार के बार-बार गठबंधन बदलने- 2022 में आरजेडी और 2024 में फिर एनडीए के साथ जाने- ने मतदाताओं में अविश्वास पैदा किया है. उनकी उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चर्चाएं भी उनकी सक्रियता पर सवाल उठा रही हैं. मिथिलांचल में जदयू का प्रभाव कम होना बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है.

महागठबंधन की चुनौतियां क्या?

महागठबंधन, जिसमें आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं को 75 सीटों पर सीमित रहने का अनुमान है. तेजस्वी यादव की युवा अपील और रोजगार जैसे मुद्दों पर जोर के बावजूद गठबंधन बीजेपी की संगठनात्मक ताकत और मोदी के करिश्मे के सामने कमजोर पड़ रहा है. मिथिलांच में महागठबंधन की कमजोर स्थिति, खासकर ब्राह्मण और वैश्य वोटरों के बीच कम समर्थन, उनकी रणनीति पर सवाल उठाता है. तेजस्वी यादव की ‘माय-बाप’ रणनीति (मुस्लिम, यादव, बहुजन, अगड़ा, महिलाएं) अभी तक अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखा पाई है.

निर्णायक होंगे सियासी समीकरण

सर्वे में जन सुराज पार्टी और बसपा जैसी छोटी पार्टियों को सीमित सफलता मिलने का अनुमान है. जन सुराज पार्टी को एक सीट और तीन सीटों पर कांटे की टक्कर की बात की गई है. उनकी लोकप्रियता युवा और ऊपरी जातियों के बीच तो बन री है, लेकिन सीटें जीतने लायक मत मिलना जनसुराज के लिए कठिन लगता है. दूसरी ओर, नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की एकजुटता और बीजेपी की आक्रामक रणनीति बिहार में सत्ता की राह आसान बनाती दिख रही है. बिहार चुनाव में विकास, बेरोजगारी और जातिगत समीकरण निर्णायक होंगे.

Vijay jha

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट...और पढ़ें

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट...

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First Published :

August 31, 2025, 14:22 IST

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