ब्रह्मोस इसके सामने धुआं-धुआं, 12000 KMPH की स्‍पीड, थर्राते हैं दुश्‍मन

3 weeks ago

Last Updated:August 04, 2025, 06:46 IST

Brahmos vs Oreshnik Hypersonic Missile: पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में सामरिक हालात काफी बदल गए हैं. रूस-यूक्रेन, इजरायल-हमास, इजरायल-ईरान, थाईलैंड-कंबोडिया और भारत-पाकिस्‍तान के बीच सैन्‍य टकराव से ग्‍लोबल...और पढ़ें

ब्रह्मोस इसके सामने धुआं-धुआं, 12000 KMPH की स्‍पीड, थर्राते हैं दुश्‍मनरूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल को लेकर चौंकाने वाली बात कही है. (फाइल फोटो/एपी)

हाइलाइट्स

सुपरसोनिक के बाद अब हाइपरसोनिक मिसाइल का आया युगहाइपरसोनिक मिसाइल की स्‍पीड इतनी कि रडार भी खा जाए गच्‍चाभारत ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के इसी वर्जन को डेवलप करने में जुटा है

Brahmos vs Oreshnik Hypersonic Missile: कुछ दश्‍क पहले आर्मी यानी थल सेना का महत्‍व काफी ज्‍यादा होता था. युद्ध में आर्मी की भूमिका काफी अहम होती थी. पिछले कुछ सालों में वॉरफेयर का स्‍वरूप बदल चुका है. एयरफोर्स और नेवी का महत्‍व काफी बढ़ गया है. पिछले कुछ सैन्‍य टकराव को देखा जाए तो मॉडर्न वॉरफेयर में मानवरहित और AI ड्रिवन वेपन सिस्‍टम अहम रोल में आ गए हैं. दुनिया के कुछ देश 5th के बाद अब छठी पीढ़ी का हथियार डेवलप करने में जुटे हैं. भारत ने भी इस दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम उठाया है. एक्‍सपर्ट की मानें तो छठी पीढ़ी के वेपन सिस्‍टम को मानवरहित के साथ ही इंसानी हस्‍तक्षेप के साथ भी ऑपरेट किया जा सकेगा. एक तरह से यह हाईब्रिड मॉडल होगा. डिफेंस सेक्‍टर एक ओर ऐसा सेगमेंट है, जिसकी तरफ दुनिया के तमाम देश लगातार काम कर रहे हैं. वह हाइपरसोनिक मिसाइल का डेवलपमेंट. रूस ने हाल में ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल की तैनाती की बात कही है. सुपरसोनिक मिसाइल की तकनीक तकरीबन हर बड़े देश के पास है, पर हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलप करना अपने आप में बेहद खास और अहम है. बता दें कि 5 मैक या उससे ज्‍यादा (6000 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे ज्‍यादा) की रफ्तार को हाइपरसोनिक का दर्जा दिया जाता है. इससे कम स्‍पीड को सुपरसोनिक कहा जाता है. हाइपरसोनिक सिस्‍टम की सबसे बड़ी खासियत प्रचंड स्‍पीड के साथ आधुनिक रडार को गच्‍चा देना है. अग्नि-5 हाइपरसोनिक इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. भारत ब्रह्मेस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का हाइपरसोनिक वर्जन डेवलप करने में जुटा है.

दरअसल, रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल को सशस्‍त्र बलों के बेड़े में शामिल करने का ऐलान किया है. साथ ही उन्होंने इस मॉडर्न मिसाइल के सीरियल प्रोडक्‍शन की बात भी कही है. रूस ने दावा किया है कि वह इस मिसाइल को साल 2025 के अंत तक बेलारूस में तैनात कर देगा. दिलचस्‍प बात यह है कि बेलारूस की यूक्रेन से तकरीबन 1100 किलोमीटर तक सीमा लगती है. ऐसे में पुतिन के इस ऐलान के बाद दुनयिाभर में खलबली मची हुई है. कुछ एक्‍सपर्ट का मानना है कि ओरेशनिक हाइपरसोनिक इंटरमीडिएट रेंज की मिसाइल है. इसकी रेंज 500 से 5500 किलोमीटर के बीच होने की संभावना है. इस तरह रूस के इस नए ब्रह्मास्‍त्र की जद में पूरा यूरोप आ जाएगा. रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से रूस के इस ऐलान से अमेरिका और यूरोप का बेचैन होना स्‍वाभाविक है. इस क्षेत्र में हथियारों की रेस शुरू होने की आशंका भी बढ़ गई है.

ब्रह्मोस बनाम ओरेशनिक

दुनिया के सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइल में से एक ब्रह्मोस को भारत और रूस ने मिलकर डेवलप किया है. यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है जो 2100 से 3400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दुश्‍मन पर अटैक कर सकती है. शुरुआत में इसकी रेंज 290 किलोमीटर ही थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 450 किलोमीटर किया गया. अब बताया जा रहा है कि भारत इसका हाइपरसोनिक वर्जन डेवलप करने में जुटा है, जिसकी रेंज 1500 किलोमीटर या उससे ज्‍यादा हो सकती है. ऐसे में यह दुन‍िया की सबसे खतरनाक और घातक क्रूज मिसाइल होगी. ब्रह्मोस के हाइपरसोनिक वर्जन की रफ्तार 6000 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्‍यादा होगी. ब्रह्मोस ट्रेडिशनल के साथ ही न्‍यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम है. दूसरी तरफ, रूस का ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल मैक 10 (12000 किलोमीटर प्रति घंटा) की रफ्तार से टारगेट की तरफ मूव कर सकती है. प्रचंड रफ्तार की वजह से यह रडार को भी गच्‍चा देने में सक्षम है.

इस वजह से बेहद खतरनाक

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ओरेशनिक पिछली रूसी मध्यम-दूरी प्रणालियों का एक उन्नत संस्करण है, जो संभवतः RS-26 रुबेज़ प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित है, लेकिन अत्याधुनिक हाइपरसोनिक और गतिशील रीएंट्री तकनीकों से उन्नत है. बताया जाता है कि यह मिसाइल मैक 10 तक की गति प्राप्त कर सकती है. यह मिसाइल MIRV टेक्‍नोलॉजी से भी लैस है, जो इसकी प्रचंडता और घातक होने की क्षमता को बढ़ाता है. यह पारंपरिक या परमाणु आयुधों का विकल्प शामिल है. ओरेशनिक की सीमा इसे पूरे यूरोप में लक्ष्यों पर प्रहार करने में सक्षम बनाती है, जिससे लगभग हर नाटो सदस्य देश इसकी पहुंच में आ जाता है.

ब्रह्मोस से उन्‍नत तकनीक

ओरेशनिक की प्रमुख परिचालन विशेषताओं में उन्नत मध्य-उड़ान गतिशीलता या साइलो-आधारित प्रक्षेपण विकल्प और गति अप्रत्याशित हैं. एक्‍सपर्ट का मानना है कि इस मिसाइल को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्‍टम इंटरसेप्‍ट नहीं कर सकता है. वहीं, ब्रह्मोस मिसाइल में फिलहाल ये सब खासियत नहीं हैं. सुपरसोनिक मिसाइल होने की वजह से रडार से इसे ट्रैक किया जा सकता है. हालांकि, ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी प्रचंडता से पाकिस्‍तान, उसके यार चीन और दुनिया के अन्‍य देशों को अचंभित कर चुका है. वहीं, ओरेशनिक को अभी तक आजमाया नहीं जा सका है.

Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

August 04, 2025, 06:45 IST

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