भारत में आमधारणा है कि वक्फ किसी भी जमीन पर कब्जा कर लेता है और उसे अपना बता देता है. ऐसे मामले देश में हर जगह हैं. आखिर इसके पीछे की वजह क्या है. क्या वाकई इसके लिए उसे कानून का भी साथ मिला हुआ है.
भारत में वक्फ संपत्तियों को लेकर ये आरोप अक्सर लगता है कि वक्फ बोर्ड गैर-मुस्लिमों या अन्य लोगों की ज़मीनों पर अवैध दावा करता है. कुछ मामलों में वक्फ बोर्ड सदियों पुराने दानपत्रों (Waqf Deeds) के आधार पर ज़मीनों पर दावा करता है, जिनकी वैधता संदिग्ध हो सकती है. आंध्र प्रदेश में कुछ हिंदू मंदिरों की ज़मीन को वक्फ रजिस्टर में दर्ज कर लिया गया, जिसे बाद में अदालतों में चुनौती दी गई.
1964 और 1995 के वक्फ सर्वे में कई गैर-वक्फ ज़मीनों को गलती से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया. जैसा दिल्ली के हौज खास इलाके में एक हिंदू मंदिर की ज़मीन को वक्फ बोर्ड ने अपने अधिकार में लेने का दावा किया, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया. कई मामलों में अदालतों ने वक्फ बोर्ड के दावों को खारिज किया है. काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में वक्फ बोर्ड का दावा कि “पूरा परिसर वक्फ है”, कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.
कुछ राज्यों में वक्फ बोर्ड पर सियासी दबाव होता है कि वह “अधिक से अधिक ज़मीन” को वक्फ घोषित करे, ताकि उस पर नियंत्रण रखा जा सके.
क्या वक्फ बोर्ड वैधानिक रूप से ऐसा कर सकता है?
वक्फ एक्ट, 1995 की धारा 4 – इसके तहत वक्फ बोर्ड को यह अधिकार है कि वह किसी भी संपत्ति को “वक्फ” घोषित कर दे, अगर उसके पास ऐतिहासिक दस्तावेज़ हैं. हालांकि अगर कोई व्यक्ति या संस्था इस दावे को चुनौती देती है, तो वक्फ ट्रिब्यूनल या अदालतें ही फैसला करती हैं.
हालांकि वक्फ बोर्ड का कहना है कि वो केवल उन्हीं ज़मीनों पर अधिकार जताते हैं, जो कानूनी रूप से वक्फ दानपत्रों या ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स में दर्ज हैं. आलोचकों का कहना है कि वक्फ बोर्ड अक्सर ज़मीन की पुरानी रजिस्ट्री का फायदा उठाकर दावे करता है, जबकि वास्तविक स्वामित्व किसी और के पास होता है.
और भी कई तरह के आरोप लगते रहे हैं
इसके अलावा वक्फ प्रणाली पर हमेशा से भ्रष्टाचार, अवैध कब्जे, राजनीतिक दखल और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं.
1. संपत्तियों का गबन और भ्रष्टाचार
आरोप: वक्फ बोर्ड के अधिकारी और ट्रस्टी संपत्तियों (जमीन, दुकानें, होटल) को कम कीमत पर किराए पर देकर या अवैध रूप से बेचकर रिश्वत खाते हैं.
– दिल्ली वक्फ बोर्ड घोटाला (2022) में बोर्ड के CEO को संपत्तियों के अवैध लीज और फंड के दुरुपयोग के आरोप में गिरफ्तार किया गया
– उत्तर प्रदेश में कथित तौर पर वक्फ जमीनों पर बिल्डरों और राजनेताओं का कब्जा.
2. वक्फ जमीनों पर अवैध कब्जा
आरोप – देशभर में 50,000 से ज्यादा वक्फ संपत्तियां अवैध रूप से कब्जाधारियों, निजी बिल्डरों या सरकारी एजेंसियों के कब्जे में हैं.
– कर्नाटक में 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु की 90% वक्फ जमीनें अवैध कब्जे में हैं.
– हैदराबाद के ऐतिहासिक मक्का मस्जिद परिसर की दुकानों पर गैर-वक्फ लोगों का कब्जा.
3. राजनीतिकरण और सांप्रदायिक दुरुपयोग
आरोप – कुछ राज्यों में वक्फ बोर्डों को सियासी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जहां नियुक्तियां योग्यता के बजाय राजनीतिक संबंधों से होती हैं.
– तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में वक्फ बोर्ड चेयरमैन पद पर राजनीतिक नियुक्तियों के आरोप.
– वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग चुनावी प्रचार में करने के दावे
4. धार्मिक भेदभाव के आरोप
आरोप: वक्फ बोर्ड गैर-मुस्लिमों द्वारा दान की गई संपत्तियों को भी “मुस्लिम संपत्ति” घोषित कर देते हैं, जिससे विवाद पैदा होते हैं.
– दिल्ली की हौज खास जमीन विवाद में 2016 में वक्फ बोर्ड ने एक हिंदू मंदिर की जमीन को अपने अधिकार में लेने का दावा किया था.
– आंध्र प्रदेश में कथित तौर पर हिंदू मठों की जमीन वक्फ रजिस्टर में दर्ज कर ली गई.
5. पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव
आरोप – वक्फ बोर्ड अपनी आय और व्यय का सार्वजनिक ब्यौरा नहीं देते. कई राज्यों में वक्फ सर्वे रिपोर्ट गायब या अधूरी हैं.
– सच्चर कमेटी (2006) ने वक्फ प्रबंधन में भ्रष्टाचार और अकुशलता की ओर इशारा किया।
– CAG (2013) ने वक्फ संपत्तियों के गलत रिकॉर्ड पर चिंता जताई।
6. कानूनी विवाद और निष्क्रियता
आरोप – वक्फ एक्ट, 1995 के तहत बोर्डों के पास अत्यधिक अधिकार हैं, लेकिन विवादों का निपटारा धीमा है.
– अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में वक्फ बोर्ड एक पक्ष था.
– काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मामले में वक्फ बोर्ड का दावा चुनौती देने वालों का कहना है कि यह संपत्ति वास्तव में वक्फ नहीं थी.