Last Updated:January 29, 2026, 12:26 IST
नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट भारत को तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियां लौटाएगा, जिनमें शिव नटराज, सोमस्कंद और संत सुंदरर विद परावई शामिल हैं. ये मूर्तियां पहले तमिलनाडु के मंदिरों में धार्मिक जुलूसों के दौरान निकाली जाती थीं.
समझौते के तहत वापस मिलेंगी मूर्तियां.नई दिल्ली. अमेरिका के प्रतिष्ठित नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट – स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन दशकों पहले मंदिरों से अवैध रूप से हटाई गईं दक्षिण भारत की तीन ऐतिहासिक कांस्य मूर्तियां भारत को वापस करेगा. जिन तीन मूर्तियों को लौटाया जा रहा है, उनमें ‘शिव नटराज’ (चोल काल, लगभग 990), ‘सोमस्कंद’ (चोल काल, 12वीं शताब्दी) और ‘संत सुंदरर विद परावई’ (विजयनगर काल, 16वीं शताब्दी) शामिल हैं. ये सभी दक्षिण भारतीय कांस्य कला परंपरा के बेहतरीन उदाहरण मानी जाती हैं. ये मूर्तियां पहले तमिलनाडु के मंदिरों में धार्मिक जुलूसों के दौरान निकाली जाती थीं.
हालांकि बुधवार को म्यूजियम ने बताया कि इनमें से एक चोलकालीन ‘शिव नटराज’ मूर्ति भारत सरकार के साथ हुए समझौते के तहत दीर्घकालिक ऋण (लॉन्ग-टर्म लोन) के तौर पर अमेरिका में ही रहेगी. इसके तहत म्यूजियम इस मूर्ति को प्रदर्शित करता रहेगा. साथ ही इसके इतिहास, अवैध हटाए जाने और वापसी की पूरी जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा करेगा.
संग्रहालय ने कहा कि इस मूर्ति को प्रदर्शनी ‘द आर्ट ऑफ नॉइंग इन साउथ एशिया, साउथईस्ट एशिया, एंड द हिमालयाज’ का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि इसके इतिहास हटाए जाने और वापसी की पूरी कहानी सार्वजनिक रूप से दिखाई जा सके.संग्रहालय ने बताया कि यह निर्णय उसकी दक्षिण एशियाई संग्रह की कई वर्षों तक चली व्यवस्थित जांच का नतीजा है. वर्ष 2023 में फ्रांस के पांडिचेरी स्थित फ्रेंच इंस्टीट्यूट के फोटो आर्काइव्स के साथ काम कर रहे शोधकर्ताओं ने पुष्टि की कि ये तीनों कांस्य मूर्तियां 1956 से 1959 के बीच तमिलनाडु के मंदिरों में खींची गई तस्वीरों में मौजूद थीं.
इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इन निष्कर्षों की समीक्षा की और तय किया कि मूर्तियों को भारतीय कानून का उल्लंघन करते हुए हटाया गया था.संग्रहालय के निदेशक चेज एफ रॉबिन्सन ने कहा, ‘हम सांस्कृतिक धरोहर को जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ संभालने के लिए प्रतिबद्ध हैं’ इन मूर्तियों की वापसी हमारे नैतिक संग्रहालय अभ्यास का प्रमाण है’ हम भारत सरकार के आभारी हैं, जिसने हमें लंबे समय से सराही जा रही शिव नटराज मूर्ति को प्रदर्शित करते रहने की अनुमति दी. संग्रहालय ने बताया कि इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वह भारत के दूतावास के साथ मिलकर काम कर रहा है. इस पूरी प्रक्रिया में संग्रहालय की प्रोवेनेंस टीम, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई कला के क्यूरेटर और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारों की अहम भूमिका रही.
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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता
करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज...और पढ़ें
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
January 29, 2026, 12:26 IST

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