भूकंप ने सबकुछ कर दिया तबाह, फिर भी बाज नहीं आ रही म्यांमार सरकार, जंग के लिए है उतारू

23 hours ago

Myanmar Earthquke: म्यांमार में 28 मार्च 2025 को आए भूकंप से काफी तबाही मची है. इस घटना में अबतक मरे हुए लोगों की संख्या 2,700 के पार हो चुकी है, हालांकि इसके बावजूद म्यांमार की सेना देश भर में प्रतिरोधी समूहों के खिलाफ अपने हमलों को जारी रख रही है. म्यांमार के जुंटा के प्रमुख ने युद्ध विराम प्रस्तावों को खारिज कर दिया है. उन्होंने सैन्य अभियानों को जारी रखने की घोषणा की है.      

युद्ध विराम प्रस्ताव किया खारिज
म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में मृतकों की संख्या बढ़कर 2,719 हो गई है. वहीं लगभग 4,521 लोग घायल हुए हैं और 441 अभी भी लापता हैं. प्रधानमंत्री मिन आंग ह्लाइंग ने इसकी जानकारी दी. वहीं इस बीच म्यांमार के जुंटा के प्रमुख आंग ह्लाइंग ने जातीय सशस्त्र संगठनों (EAO) के युद्ध विराम प्रस्तावों को खारिज कर दिया और सैन्य अभियान जारी रखने की घोषणा की. ह्लाइंग ने मंगलवार 1 अप्रैल को कहा,' कुछ जातीय सशस्त्र समूह अभी सक्रिय रूप से लड़ाई में शामिल नहीं हो रहे, लेकिन वे हमलों की तैयारी के लिए इकट्ठा हो रहे हैं और प्रशिक्षण ले रहे हैं. चूंकि यह आक्रामकता का एक रूप है, इसलिए सेना जरूरी रक्षा अभियान जारी रखेगी.' 

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मानवीय सहायता में आ रही दिक्कत 
'म्यांमार नाउ' की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे वक्त में जब वैश्विक ध्यान भूकंप के विनाश और मानवीय सहायता भेजने पर केंद्रित है, म्यांमार की सेना ने देश भर में प्रतिरोधी समूहों के खिलाफ अपने हमले जारी रखे हैं. हमलों पर चिंता जताते हुए अमेरिका स्थित एडवोकेसी ग्रुप 'ह्यूमन राइट्स वॉच' ने कहा कि म्यांमार की सैन्य सरकार को भूकंप पीड़ितों के लिए मानवीय सहायता तक तत्काल, निर्बाध पहुंच की अनुमति देनी चाहिए साथ ही आपातकालीन प्रतिक्रिया में बाधा डालने वाले प्रतिबंधों को हटाना चाहिए. एडवोकेसी ग्रुप के अनुसार, 28 मार्च 2025 को क्षेत्र में आए भूकंप के बाद से सेना ने हवाई हमले किए और गंभीर रूप से प्रभावित क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच सीमित कर दी, जिससे मानवीय प्रतिक्रिया और अधिक जटिल हो गई.

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म्यांमार की सेना से मांग 
'ह्यूमन राइट्स वॉच' की एशिया उप निदेशक ब्रायोनी लाउ ने कहा,' म्यांमार की सैन्य सरकार अभी भी भय पैदा करती है, यहां तक ​​कि एक भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद भी जिसमें हजारों लोग मारे गए और घायल हुए. सरकार को अपने पिछले भयावह व्यवहार से बाहर आना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में जिन लोगों की जान जोखिम में है, उन तक मानवीय सहायता शीघ्र पहुंचे.' लाऊ ने कहा,' म्यांमार की सेना पर इस पैमाने की आपदा से निपटने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता. संबंधित सरकारों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को सेना पर दबाव डालना चाहिए कि वह जीवित बचे लोगों तक पूरी और तत्काल पहुंच की अनुमति दे, चाहे वे कहीं भी हों.' ( इनपुट-आईएएनएस) 

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