लड़की ना कहती रही, मंगेतर ने फेरों से पहले मना ली सुहागरात, जज बोले- तुम इतनी

1 day ago

Last Updated:April 02, 2025, 13:32 IST

Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्‍त रुख अख्तियार किया. कोर्ट ने लड़की से साफ-साफ कह दिया कि तुम इतनी भी भोली नहीं हो. कोर्ट ने पुरुषों पर लगातार दर्ज हो रहे फर्जी मुकदमों का भी हवाला दिया.

लड़की ना कहती रही, मंगेतर ने फेरों से पहले मना ली सुहागरात, जज बोले- तुम इतनी

कोर्ट ने सख्‍त रुख अख्तियार किया. (File Photo)

Supreme Court News: महिलाओं द्वारा युवकों पर यौन उत्‍पीड़न के झूठे मुकदमे दर्ज कराने की इन दिनों देश में बाढ़ सी आई हुई है. शादी का झांसा देकर रेप के मामले में कोर्ट पहले ही काफी सख्‍त हैं. इसी बीच एक पुरुष पूर्व मंगेतर द्वारा दर्ज कराए गए मामले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इसपर महिला पक्ष की तरफ से कहा कि युवक के साथ उसका रिश्‍ता हुआ था. शादी से पहले उसने मना करने के बावजूद भी संबंध बनाए और फिर वो रिश्‍ते से पीछे हट गया. शादी के झूठे बहाने से उसके साथ रेप किया गया है. इस मामले में जज साहब ने भी सख्‍त रुख अख्तियार किया. उन्‍होंने साफ कहा कि अगर तुम इतनी भोली होती तो हमारे सामने नहीं आती.

बार एंड बेंच की खबर के अनुसार न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने कहा कि आप बालिग हैं. ऐसा नहीं हो सकता कि आपको यह विश्वास दिला दिया गया हो कि आपकी शादी हो जाएगी आदि. पूरे सम्मान के साथ मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आज नैतिकता, सद्गुणों की अवधारणा युवाओं के बीच अलग है. यदि हम आपकी बात से सहमत हैं तो कॉलेज में लड़के और लड़की के बीच कोई भी संबंध दंडनीय हो जाएगा. मान लीजिए कि वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं और लड़की विरोध करती है.. और लड़का कहता है कि मैं अगले सप्ताह तुमसे शादी करूंगा.. फिर वह नहीं करता.. तो फिर क्‍या यह अपराध है?

लड़कियां ससुरालवालों पर दर्ज करा रही केस
वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने कहा कि सहमति की अवधारणा अहम है. सगाई टूटना एक सामाजिक वर्जित विषय होगा. यहां सहमति स्वतंत्र सहमति नहीं है. न्यायमूर्ति सुंदरेश ने कहा कि रूढ़िवादी मानसिकता काम कर रही है क्योंकि यहां पुरुष को दोषी ठहराया जाता है. हमारी व्यवस्था में खामियां हैं. अगर कुछ करना है तो कई बार लड़की अपने ससुराल वालों के खिलाफ 5 केस कर देती है. आप हमसे जो भी टिप्पणी चाहते हैं या हाईकोर्ट की टिप्पणी को दरकिनार करना चाहते हैं… कोई बात नहीं.. आखिरकार आप ही पीड़ित हैं.

‘मेरी भी एक बेटी है’
महिला के वकील की तरफ से इसपर कहा गया कि वह सोचती थी कि अगर वह उसे खुश नहीं करती है तो वह उससे शादी नहीं करता. उनकी सगाई हो चुकी थी. यह पुरुष के लिए कैजुअल सेक्स हो सकता है लेकिन महिला के लिए नहीं. जस्टिस सुंदरेश ने जवाब देते हुए कहा कि इतने वरिष्ठ वकील को केस के लिए नियुक्त किया गया है. ऐसे में हम यह नहीं कह सकते कि लड़की इतनी भोली है. हम इसे केवल एक नजरिए से नहीं देख सकते. हमें किसी एक जेंडर से कोई लगाव नहीं है. मेरी भी एक बेटी है और अगर वह भी इस स्थिति में है तो मुझे इसे व्यापक नजरिए से देखने की जरूरत है. अब इस मामले को देखिए. क्या इतनी कमजोर सामग्री के साथ यहां दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सकती है?

लैंगिक समानता जरूरी
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि हम वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं कर सकते. सीनियर एडवोकेट दीवान ने इसपर कहा कि यह कोई रोमांटिक रिश्ता नहीं है जो खराब हो गया. यह परिवार द्वारा तय किया गया था. जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है? कल चाहे शादीशुदा हो या नहीं.. वैवाहिक बलात्कार का आरोप लगाया जा सकता है. एकमात्र तथ्य यह है कि विवाह नहीं हुआ. मेरा दृढ़ विश्वास है कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत लैंगिक समानता होनी चाहिए. मुझे लगता है कि मानदंड महिला को पुरुष के साथ रहने के लिए कैसे मजबूर कर सकते हैं.

‘महिलाओं के पास सौदेबाजी की शक्ति नहीं’
बैंच में मौजूद दूसरे जज न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने कहा कि आपने इस विकल्प के साथ संबंध स्वीकार किया कि इसे किसी दिन तोड़ा जा सकता है. वकील ने कहा कि महिला के पास आमतौर पर सौदेबाजी की शक्ति नहीं होती. उसके पिता को कैंसर था और वह उसकी शादी करवाना चाहते थे. महिला केवल पुरुष को खुश करना चाहती थी.

First Published :

April 02, 2025, 13:28 IST

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