न्यूज18 मलयालम
Kerala Horse Trading Audio Leak: गॉड्स ऑन कंट्री कहे जाने वाले केरल की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. पंचायत चुनाव जैसे निचले स्तर के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा एक ऑडियो क्लिप अब 50 लाख रुपए की कथित डील, क्रॉस वोटिंग और अचानक हुए इस्तीफे की वजह से बड़े सियासी तूफान में बदल चुका है. वडक्कनचेरी ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष चुनाव से जुड़ा यह मामला अब सतर्कता जांच के दायरे में आ गया है.
ऑडियो सामने आने के बाद सवाल सिर्फ एक वोट का नहीं रह गया, बल्कि यह बहस छिड़ गई है कि क्या सत्ता बचाने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग का सहारा लिया गया. एक ओर आरोप, दूसरी ओर इनकार और बीच में एक निर्दलीय सदस्य का इस्तीफा इस पूरे घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
मामला त्रिशूर जिले के वडक्कनचेरी ब्लॉक पंचायत अध्यक्ष चुनाव से जुड़ा है. यहां यूडीएफ और एलडीएफ दोनों के पास सात-सात सीटें थीं. ऐसे में मुस्लिम लीग समर्थित निर्दलीय सदस्य ईयू जाफर का वोट निर्णायक बन गया. जाफर ने आखिरकार एलडीएफ उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया और एलडीएफ ने पंचायत पर कब्जा कर लिया.
ऑडियो क्लिप में क्या दावा किया गया?
विवाद की जड़ एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इसमें जाफर और कांग्रेस नेता एए मुस्तफा के बीच बातचीत बताई जा रही है. इस बातचीत में दावा किया गया कि जाफर को सीपीएम की ओर से दो विकल्प दिए गए या तो अध्यक्ष पद, या फिर 50 लाख रुपए लेकर एलडीएफ उम्मीदवार को वोट. ऑडियो में जाफर कथित तौर पर कहते हैं कि अगर वह यह ऑफर स्वीकार कर लेते हैं, तो “उनकी ज़िंदगी सेट हो जाएगी”, लेकिन राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है.
क्यों अहम हो गया जाफर का वोट?
वडक्कनचेरी ब्लॉक पंचायत में वर्षों से एलडीएफ का दबदबा रहा है. 2020 में एलडीएफ ने 13 में से 11 सीटें जीती थीं. इस बार समीकरण बदले और बराबरी की स्थिति बन गई. ऐसे में एक निर्दलीय सदस्य का रुख बदलना सत्ता की चाबी बन गया.
ईयू जाफर.
इस्तीफे ने बढ़ाया सस्पेंस
चुनाव के ठीक अगले दिन ईयू जाफर ने पंचायत सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इतना ही नहीं, वह उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भी मौजूद नहीं रहे. इससे वह पद भी एलडीएफ के खाते में चला गया. जाफर का यह कदम पूरे विवाद को और गहरा कर गया.
शिकायत के बाद जांच कैसे शुरू हुई?
ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और केपीसीसी महासचिव अनिल अक्कारा ने राज्य पुलिस प्रमुख और सतर्कता निदेशक को औपचारिक शिकायत दी. इसके बाद केरल विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने प्रारंभिक जांच शुरू कर दी.
जांच में क्या देखेगी सतर्कता टीम?
विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक, सबसे पहले ऑडियो की प्रामाणिकता, रिकॉर्डिंग की परिस्थितियां और इसके प्रसार की जांच की जाएगी. इसके बाद ही तय होगा कि आगे एफआईआर या विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं.
आरोपों पर जाफर और CPM का जवाब
ईयू जाफर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि फोन पर हुई बातचीत सिर्फ मजाक थी. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कोई रिश्वत नहीं ली और एलडीएफ को वोट देना उनकी ‘गलती’ थी, जिसका उन्हें पछतावा है. जाफर ने यहां तक कहा कि वह पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए भी तैयार हैं. सीपीएम की ओर से राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि पार्टी हॉर्स ट्रेडिंग नहीं करती और किसी को पकड़ने के लिए 50 लाख रुपए खर्च करने की जरूरत नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जांच होनी चाहिए और अगर आरोप साबित होते हैं, तो कार्रवाई होगी.
राजनीतिक असर क्या होगा?
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केरल में पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म है. विपक्ष इसे सत्ता बचाने के लिए की गई कथित सौदेबाज़ी बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है. जांच के नतीजे तय करेंगे कि यह सिर्फ एक ऑडियो विवाद था या वाकई लोकतांत्रिक प्रक्रिया से खिलवाड़.

1 hour ago
