Last Updated:July 17, 2025, 10:12 IST
CBSE ने छात्रों में स्वस्थ भोजन की आदतें बढ़ाने के लिए ‘शुगर बोर्ड’ के बाद अब ‘ऑयल बोर्ड’ की पहल की सिफारिश की है, जिससे वसा सेवन पर जागरूकता बढ़े.

CBSE ने बच्चों के मोटापे रोकने के लिए उठाया ये कदम
CBSE Oil Board: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली छात्रों में स्वस्थ खाने की आदतें विकसित करने के लिए अपने जागरूकता अभियान को और आगे बढ़ाया है. ‘शुगर बोर्ड’ पहल के बाद अब बोर्ड ने ‘ऑयल बोर्ड’ शुरू करने की सिफ़ारिश की है ताकि वसा और तेलों के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान के प्रति छात्रों को जागरूक किया जा सके.
स्कूल कैंपस में दिखेंगे हेल्थ संदेश
CBSE ने निर्देश दिया है कि स्कूल अपने कैंपस में जैसे कि कैफेटेरिया, लॉबी, मीटिंग रूम आदि स्थानों पर डिजिटल या छपे हुए पोस्टर के ज़रिए ‘ऑयल बोर्ड’ प्रदर्शित करें. इनका उद्देश्य छात्रों और स्टाफ को यह याद दिलाना है कि अधिक वसा वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं.
बढ़ते मोटापे को देखते हुए उठाया कदम
यह पहल ऐसे समय में लाई गई है जब भारत में बच्चों और किशोरों में मोटापे के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई जा रही है. CBSE ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) और लैंसेट के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि भारत में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त लोगों की संख्या आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकती है.
खराब खानपान और कम गतिविधि है मुख्य वजह
CBSE ने कहा कि बच्चों में अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन, जंक फूड की आदतें और फिजिकल एक्टिविटीज की कमी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं. ऐसे में स्कूल लेवल पर ही स्वस्थ जीवनशैली की नींव रखना ज़रूरी है.
CBSE ने स्कूलों को क्या करने को कहा है?
CBSE ने ‘ऑयल बोर्ड’ को प्रभावी बनाने के लिए स्कूलों को ये सुझाव दिए हैं.
दृश्य संकेतक लगाएं: विद्यालयों के प्रमुख हिस्सों में ऐसे बोर्ड या पोस्टर लगाएं जो अस्वास्थ्यकर वसा के खतरों के प्रति सचेत करें.
स्टेशनरी में स्वास्थ्य संदेश जोड़ें: स्कूल लेटरहेड, नोटपैड, फोल्डर आदि पर स्वास्थ्य से जुड़े छोटे संदेश शामिल करें.
स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा दें: स्कूल की कैंटीन में पोषणयुक्त भोजन और कम फैट वाले विकल्प रखें.
गतिविधि को प्रेरित करें: बच्चों को सीढ़ियां चढ़ने, टहलने और खेलकूद जैसी गतिविधियों के लिए प्रेरित करें.
छात्रों की सक्रिय भागीदारी पर ज़ोर
CBSE ने यह भी कहा कि इस अभियान में छात्रों की भागीदारी अहम होगी. स्कूलों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे कक्षा परियोजनाओं में छात्रों को ऑयल बोर्ड तैयार करने का अवसर दें, जिसमें वे अस्वास्थ्यकर तेलों के प्रभाव पर शोध करें, पोस्टर डिज़ाइन करें और जागरूकता सामग्री तैयार करें.
FSSAI से मिलेंगे सहायता सामग्री
स्कूल इस पहल में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा प्रदान किए गए संसाधनों की मदद भी ले सकते हैं. इसमें वीडियो, पोस्टर और अन्य डिजिटल सामग्री शामिल हैं, जिन्हें FSSAI के यूट्यूब चैनल या सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है.
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पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin...और पढ़ें
पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin...
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