Last Updated:August 30, 2025, 07:28 IST
Interpol Purple Notice: ED ने पहली बार इंटरपोल के जरिये पर्पल नोटिस जारी करवाया है. इस नोटिस के अपने मायने होते हैं, पर प्रवर्तन निदेशालय को यह कदम क्यों उठाना पड़ा और यह किन परिस्थितियों में जारी किया जाता है...और पढ़ें

Interpol Purple Notice EXPLAINER: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आर्थिक अपराधों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहल की है. एजेंसी ने पहली बार इंटरपोल के ज़रिए पर्पल नोटिस जारी करवाया है. यह नोटिस 21 अगस्त 2025 को जारी हुआ, जिसमें एक नए किस्म के ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश किया गया है. ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि कुछ घरेलू और विदेशी शेल कंपनियां मिलकर अवैध धन को वैध बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार का इस्तेमाल कर रही थीं. इसमें कई तरह की तरकीबें अपनाई गईं.
इन फर्जी तरीकों से भारी पैमाने पर अवैध लेन-देन को वैध व्यापार के रूप में छिपाने की कोशिश की गई. यह तरीका हवालाबाज़ी जैसा ही है, लेकिन इसमें बैंकिंग चैनलों और कागज़ी कंपनियों का सहारा लिया गया ताकि रेगुलेटर पकड़ न पाए. आमतौर पर फ्रॉडस्टर इन तरीकों को अपनाते हैं -:
अंडर-इनवॉइसिंग: आयात का बिल वास्तविक से कम दिखाना.
फर्जी ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट्स: जैसे सेमीकंडक्टर का झूठा आयात.
नकली दस्तावेज़ और कंप्लायंस पेपर.
सर्कुलर ट्रेडिंग: एक ही माल को अलग-अलग देशों के जरिए बार-बार निर्यात दिखाना.
पर्पल नोटिस का क्या है मतलब
इंटरपोल का पर्पल नोटिस 196 सदस्य देशों की एजेंसियों को यह जानकारी देता है कि अपराधी किस तरह नई-नई तकनीकों से कानून को चकमा दे रहे हैं. ईडी का यह कदम बताता है कि भारत अब घरेलू ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों से लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है. ईडी ग्लोबल नेटवर्क और एसेट रिकवरी इंटर-एजेंसी नेटवर्क (एशिया पैसिफिक) जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर दुनिया भर की एजेंसियों को जागरूक कर रहा है, ताकि अपराधियों को कहीं भी सुरक्षित ठिकाना न मिले.
इंटरपोल 9 तरह के नोटिस करता है जारी
रेड नोटिस: अभियोजन के लिए या सजा काटने के लिए वांछित व्यक्तियों का पता लगाने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए.
येलो नोटिस: गुमशुदा व्यक्तियों (प्रायः नाबालिगों) का पता लगाने में सहायता करने के लिए या ऐसे व्यक्तियों की पहचान करने में सहायता करने के लिए जो स्वयं को पहचानने में असमर्थ हैं.
ब्लू नोटिस: किसी आपराधिक जांच के संबंध में किसी व्यक्ति की पहचान, स्थान या गतिविधियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी एकत्र करना.
ब्लैक नोटिस: अज्ञात शवों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए.
ग्रीन नोटिस: किसी व्यक्ति की आपराधिक गतिविधियों के बारे में चेतावनी देने के लिए, जहां उस व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए संभावित खतरा माना जाता है.
ऑरेंज नोटिस: किसी घटना, व्यक्ति, वस्तु या प्रक्रिया के बारे में चेतावनी देने के लिए जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर और संभावित खतरा हो.
पर्पल नोटिस: अपराधियों द्वारा इस्तेमाल कार्यप्रणाली यानी मॉडस ऑपरेंडी, वस्तुओं, उपकरणों और छिपाने के तरीकों के बारे में जानकारी मांगना या उपलब्ध कराना.
सिल्वर नोटिस (पायलट फेज): आपराधिक संपत्तियों की पहचान और पता लगाने के लिए.
इंटरपोल-संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद विशेष सूचना: उन संस्थाओं और व्यक्तियों के लिए जारी की जाती है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रतिबंध समितियों के निशाने पर हैं.
फाइनेंशियल फ्रॉड पर नकेल की कोशिश
विशेषज्ञ मानते हैं कि इंटरपोल के जरिए जारी यह पर्पल नोटिस न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत है, बल्कि दूसरे देशों को भी अलर्ट करेगा और भविष्य में ऐसे जटिल वित्तीय अपराधों को पकड़ना आसान बनाएगा. बता दें कि आजकल फाइनेंशियल फ्रॉड को तरह-तरह से अंजाम दिया जा रहा है. यह इतना जटिल होता है कि इसे पकड़ पाना काफी मुश्किल होता है. वित्तीय धोखाधड़ी के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने इससे निपटने के लिए स्पेशल एजेंसी बनाई है. ईडी भी उसी कैटेगरी में आता है.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...
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Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
August 30, 2025, 07:21 IST