Last Updated:April 02, 2025, 13:47 IST
Waqf Amendment Bill: प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर जेडीयू की मांग मान ली है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे भविष्योन्मुखी करार दिया. जेडीयू ने इस कदम का स्वागत किया है.

लोकसभा में किरेन रिजिजू ने इसकी घोषणा की.
हाइलाइट्स
वक्फ संशोधन बिल पर जेडीयू की मांग मान ली गई.बिल पुरानी वक्फ संपत्तियों पर लागू नहीं होगा.जेडीयू ने बिल का स्वागत किया, मुस्लिम हितों की रक्षा की.Waqf amendment Bill: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पर एनडीए की सहयोगी जेडीयू की एक बड़ी मांग मान ली है. लोकसभा में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल पेश करते खुद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसकी घोषणा की. दरअसल, जेडीयू बार-बार कहती रही है कि उसका मानना है कि इस विधेयक को भविष्योनमुखी बनाया जाए. जेडीयू के राज्यसभा सांसद और कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि जेडीयू मुस्लिम समुदाय के साथ अहित नहीं होने देगी. वहीं जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी को किसी से धर्मनिरपेक्षता सीखने की जरूरत नहीं है.
जेडीयू और अन्य सहयोगी दलों की ओर से उठ रहे सवालों के बीच किरेन रिजिजू ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को ‘प्रोस्पेक्टिव’ यानी भविष्योन्मुखी करार दिया है. इसका मतलब है कि यह बिल पुरानी वक्फ संपत्तियों या पहले के मामलों पर लागू नहीं होगा, बल्कि केवल भविष्य के नियमों और बदलावों पर काम करेगा. यह बयान लोकसभा में बुधवार को विधेयक पर चर्चा के दौरान आया. रिजिजू ने कहा कि यह बिल देश हित में है और इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना है. उन्होंने विपक्ष पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह गरीब मुस्लिमों के हित में है.
जेडीयू ने स्वागत किया
एनडीए के प्रमुख सहयोगी जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) ने शुरू से इस बिल को ‘रेट्रोस्पेक्टिव’ यानी पुरानी तारीख से लागू करने का विरोध किया था. जदयू के राज्यसभा सांसद संजय झा ने इस कदम का स्वागत किया है. संजय झा ने कहा, “हमारी पार्टी की पुरानी मांग थी कि यह बिल पुरानी संपत्तियों को प्रभावित न करे. अगर ऐसा होता तो विवाद बढ़ता और मुस्लिम समुदाय में नाराजगी फैलती. सरकार ने हमारी बात सुनी और इसे प्रोस्पेक्टिव रखा, जो स्वागत योग्य है.” उन्होंने यह भी कहा कि जदयू बिहार में मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगी जो उनके हितों को नुकसान पहुंचाए.
जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जेपीसी (संयुक्त संसदीय समिति) के सामने रखी थी. नीतीश ने पिछले 19 सालों में बिहार में मुस्लिम समुदाय के लिए किए गए कामों का जिक्र करते हुए कहा था कि वे किसी “गलत काम” को बर्दाश्त नहीं करेंगे. रिजिजू का बयान जदयू की मांगों के अनुरूप है. इस बिल से “वक्फ बाय यूजर” नियम हटाया गया है, जिसके तहत बिना दस्तावेजों के लंबे इस्तेमाल से संपत्ति को वक्फ माना जाता था. इससे पुरानी संपत्तियों पर नए दावों का खतरा कम होगा.
रिजिजू ने कहा कि यह बिल भ्रष्टाचार रोकने और प्रबंधन को बेहतर करने के लिए है. उन्होंने विपक्ष के विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया. हालांकि, विपक्ष और मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानते हैं. उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना और कलेक्टर को सर्वे का अधिकार देना मुस्लिम अधिकारों के खिलाफ है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे असंवैधानिक बताते हुए देशव्यापी विरोध की योजना बनाई है.
जदयू और टीडीपी जैसे सहयोगियों का समर्थन सरकार के लिए राहत की बात है. संजय झा के बयान से साफ है कि जदयू इस बिल के मौजूदा स्वरूप से संतुष्ट है. लेकिन विधेयक का भविष्य संसद में होने वाली बहस और विपक्ष के रुख पर निर्भर करेगा. यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है.
First Published :
April 02, 2025, 13:47 IST