Last Updated:July 17, 2025, 13:22 IST
Bengaluru 100cr. money laundering scam: बेंगलुरु में शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक और अन्य संस्थानों से जुड़े 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने 15 ठिकानों पर छापेमारी की. श्रीनिवास मूर्ति और उनके...और पढ़ें

बेंगलुरु में ईडी ने एक साथ 15 ठिकानों पर छापेमारी की है.
हाइलाइट्स
ED ने बेंगलुरु में 100 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छापेमारी की.शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक के संस्थापक श्रीनिवास मूर्ति मुख्य आरोपी हैं.घोटाले में हजारों जमाकर्ताओं को ऊंचे ब्याज का लालच देकर ठगा गया.Bengaluru 100cr. money laundering scam: बेंगलुरु में एक और बड़े वित्तीय घोटाले ने सहकारी बैंकों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक, श्रुति सौहार्द क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी और श्री लक्ष्मी महिला को-ऑपरेटिव सोसायटी से जुड़े 100 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बेंगलुरु और आसपास के 15 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई एन. श्रीनिवास मूर्ति, उनकी पत्नी धारिणी देवी, बेटी मोक्षतारा और अन्य करीबी सहयोगियों के खिलाफ दर्ज प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) के आधार पर की गई, जो बेंगलुरु के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है. इस घोटाले ने हजारों जमाकर्ताओं को ठगा, जिन्हें ऊंचे ब्याज का लालच देकर फंसाया गया.
श्रीनिवास मूर्ति और उनका परिवार
श्रीनिवास मूर्ति, शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक के संस्थापक और चेयरमैन हैं. वह इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार हैं. उनकी पत्नी धारिणी देवी बैंक की डायरेक्टर हैं, जबकि बेटी मोक्षतारा फंक्शनल डायरेक्टर की भूमिका में हैं. मूर्ति ने अपने परिवार और करीबियों के साथ मिलकर एक जटिल जाल बुनकर हजारों जमाकर्ताओं को ठगा. आरोप है कि बैंक ने ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सेविंग्स अकाउंट पर 2021-22 से ब्याज देना बंद कर दिया. जब जमाकर्ताओं ने ब्याज या अपनी जमा राशि मांगी, तो बैंक कर्मचारियों ने सर्वर की समस्या जैसे बहाने बनाकर उन्हें टाल दिया.
ठगी का जाल
ईडी की जांच में सामने आया कि मूर्ति ने लोगों को 9% तक की आकर्षक ब्याज दरों का लालच देकर फिक्स्ड डिपॉजिट और टर्म डिपॉजिट में निवेश के लिए प्रेरित किया. हजारों जमाकर्ताओं, खासकर वरिष्ठ नागरिकों और मध्यम वर्ग के परिवारों ने अपने और अपने परिवार के नाम पर भारी मात्रा में धन जमा किया. शुरुआत में कुछ जमाकर्ताओं को ब्याज दिया गया, जिससे बैंक की विश्वसनीयता बनी रही. हालांकि, 2021-22 के बाद न तो ब्याज दिया गया और न ही FD को बंद करने की अनुमति दी गई, जिससे जमाकर्ताओं में हड़कंप मच गया.
फर्जी संस्थानों का खेल
श्रीनिवास मूर्ति ने शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक के बाद श्रुति सौहार्द क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की स्थापना की, जिसमें उनके रिश्तेदार बीवी सतीश को अध्यक्ष और भतीजे दीपक जी को उपाध्यक्ष बनाया गया. इसके अलावा, उनकी दूसरी पत्नी द्वारा संचालित श्री लक्ष्मी महिला को-ऑपरेटिव सोसायटी भी इस घोटाले का हिस्सा बनी. इन संस्थानों के जरिए मूर्ति ने और अधिक लोगों से धन जमा करवाया और उसे गलत तरीके से उपयोग किया.
मनी लॉन्ड्रिंग का जटिल जाल
ED की जांच से पता चला कि मूर्ति ने बैंक की हर महत्वपूर्ण कमेटी- लोन, निवेश और ऑडिट के चेयरमैन की भूमिका खुद संभाली, जिससे वे बैंक की रकम का मनमाने ढंग से उपयोग कर सके. उन्होंने अपने करीबी लोगों और फर्जी कंपनियों को बिना किसी गारंटी के बड़े लोन बांटे, जिनमें से अधिकांश अब गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) बन चुके हैं. इन लोन की रकम को अक्सर नकद में निकाला गया या मूर्ति, उनके परिवार और उनके व्यापारिक संस्थानों के खातों में घुमाया गया. इस धन को बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में हाई-वैल्यू संपत्तियों जैसे कृषि भूमि, आवासीय अपार्टमेंट और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश किया गया.
ED ने छापेमारी के दौरान 20 से अधिक ऐसी संपत्तियों का पता लगाया, जिन्हें पहले कर्नाटक पुलिस या KPIDE की जांच में नहीं पकड़ा गया था. मूर्ति ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबियों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर धन को इधर-उधर घुमाया, ताकि उसका असली स्रोत छुपाया जा सके. यह मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक तरीका है, जिसमें काले धन को वैध दिखाने के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन किए जाते हैं. जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की पहचान हुई है.
कानूनी कार्रवाई और जांच
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत ECIR दर्ज की है और कड़ी कार्रवाई कर रही है. इससे पहले 2022 में बेंगलुरु की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने मूर्ति, उनकी पत्नी, बेटी और दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार किया था. CCB ने 14 ठिकानों पर छापेमारी कर संपत्ति और लोन से संबंधित दस्तावेज जब्त किए थे. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी 2022 में शुश्रुति बैंक पर 5,000 रुपये प्रति खाता की निकासी सीमा लागू की थी और नए लोन या जमा स्वीकार करने पर रोक लगा दी थी. इस घोटाले ने हजारों जमाकर्ताओं, खासकर वरिष्ठ नागरिकों को गहरे संकट में डाल दिया है. कई जमाकर्ताओं ने बैंक कर्मचारियों द्वारा धमकी दिए जाने की शिकायतें दर्ज की हैं.
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स...और पढ़ें
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