मॉस्को में डोभाल, मोदी का XI से मिलने का प्लान तय, खिसियाए ट्रंप, किसका नुकसान

3 weeks ago

Last Updated:August 06, 2025, 20:30 IST

India-US News: अजित डोभाल रूस में ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं. वहीं पीएम मोदी की शी जिनपिंग से मुलाकात तय मानी जा रही है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्ट टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ट...और पढ़ें

मॉस्को में डोभाल, मोदी का XI से मिलने का प्लान तय, खिसियाए ट्रंप, किसका नुकसानट्रंप ने भारत पर 50% का टैरिफ लगाया.

नई दिल्ली: भारत ने हाल के दिनों में ऐसे कदम उठाए हैं जिसने अमेरिका की बेचैनी बढ़ा दी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल रूस के मास्को दौरे पर हैं, जहां ऊर्जा और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है. उधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने का प्लान लगभग तय माना जा रहा है. यह दोनों घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि भारत अब वैश्विक राजनीति में किसी के दबाव में नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर खेल रहा है. इस बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया.

यह ट्रंप की उस खीझ का नतीजा है जो रूस से भारत के सस्ते तेल आयात और रणनीतिक साझेदारी को लेकर बढ़ रही है. भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा है और वह इसे किसी भी बाहरी दबाव के सामने कुर्बान नहीं करेगा.

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रूस के साथ डोभाल का मास्को मिशन
डोभाल की मास्को यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और रूस के बीच तेल, रक्षा और तकनीकी सहयोग को लेकर गहरी बातचीत चल रही है. रूस से रियायती दर पर तेल खरीदने के भारत के फैसले ने अर्थव्यवस्था को राहत दी है. यही नहीं, यह यात्रा भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूती देती है. अमेरिका के विरोध के बावजूद भारत ने रूस को ऊर्जा साझेदारी के लिए एक भरोसेमंद सहयोगी बनाए रखा है. इसी कारण ट्रंप भारत से खीज गए हैं. हालांकि यूरोपीय देश भी रूस से तेल खरीदते हैं लेकिन ट्रंप यूरोपीय देश पर नरमी बरत रह हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2022 से अब तक यूरोपीय संघ ने रूस से कुल 297 अरब यूरो का सामान आयात किया है. यूरोपीय संघ अब भी रूस से तेल, प्राकृतिक गैस, खाद, लोहा और स्टील खरीद रहा है. वहीं नाटो का सदस्य तुर्की, चीन और भारत के बाद रूसी तेल का तीसरा बड़ा खरीदार बना हुआ है.

इधर भारत की इस नीति को दुनिया में “बैलेंसिंग डिप्लोमेसी” कहा जा रहा है. जहां भारत पश्चिमी दबाव झेलते हुए भी अपने हितों पर डटा हुआ है. डोभाल की रूस यात्रा अमेरिका को यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अब अपने फैसले खुद करेगा.

PM मोदी-जिनपिंग मुलाकात: सीमा विवाद के बाद पहली बार
पीएम नरेंद्र मोदी का 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के लिए संभावित दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक हो सकता है. यह 2018 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा होगी और लद्दाख सीमा विवाद के बाद पहली बार मोदी-जिनपिंग आमने-सामने होंगे. यह मुलाकात सिर्फ सीमा मसले तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि SCO प्लेटफॉर्म पर ऊर्जा, आतंकवाद और व्यापार जैसे अहम मुद्दों पर भी बात होगी.

ट्रंप की बौखलाहट और व्यापारिक टकराव
ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ के फैसले से भारत-अमेरिका के बीच तनाव और गहरा गया है. अनुमान है कि इससे करीब 64 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात प्रभावित हो सकते हैं. इनमें कपड़ा, फार्मा, रत्न और पेट्रोकेमिकल जैसे सेक्टर शामिल हैं. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर सीमित होगा क्योंकि भारत ने पहले से ही अपने व्यापारिक नेटवर्क को विविध किया है और वैकल्पिक बाजार तलाशे हैं.

भारत के लिए अमेरिकी दबाव में झुकना मुश्किल है क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा, खासकर रूस से सस्ता तेल, घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभा रहा है.

वैश्विक राजनीति में भारत की स्वतंत्र राह
भारत ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति ‘इंडिया फर्स्ट’ के सिद्धांत पर आधारित है. चाहे रूस हो, चीन या अमेरिका… भारत सभी के साथ अपने हितों के आधार पर रिश्ते तय करेगा. डोभाल का मास्को दौरा और पीएम मोदी-जिनपिंग मुलाकात यही दिखाते हैं कि भारत वैश्विक मंच पर संतुलन साधने के लिए सक्रिय और आत्मनिर्भर दोनों है.

अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से तेल खरीद और SCO जैसे मंचों पर सक्रियता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का उदाहरण है. यह वही नीति है जिसने भारत को पश्चिमी और पूर्वी दोनों गुटों में समान दूरी बनाए रखने में मदद दी है.

किसका होगा असली नुकसान?
ट्रंप का टैरिफ भारत पर दबाव बनाने का प्रयास है लेकिन इससे अमेरिकी कंपनियों पर भी असर पड़ेगा जो भारतीय बाजार पर निर्भर हैं. वहीं भारत रूस से सस्ती ऊर्जा और चीन के साथ संवाद जारी रखकर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति मजबूत कर रहा है.

नतीजा साफ है… भारत ने दिखा दिया है कि वह अब अमेरिका के एकतरफा आदेश पर नहीं चलेगा. यह नई विदेश नीति भारत को सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में निर्णायक भूमिका निभाने वाला खिलाड़ी बना रही है.

Sumit Kumar

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master's degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, ...और पढ़ें

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master's degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, ...

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First Published :

August 06, 2025, 20:30 IST

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