F-35 फाइटर जेट का खेल हो जाएगा खत्‍म, Su-57 बन जाएगा 5th जेनरेशन एयरक्राफ्ट का सरताज, अगर भारत कर दे यह गेम

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Last Updated:February 02, 2026, 06:19 IST

F-35 vs Su-57 5th Generation Jet: मॉडर्न वॉरफेयर में आर्मी की भूमिका सीमित हो गई है, जबकि एयरफोर्स और नेवी का रोल लगातार बढ़ता जा रहा है. ऐसे में भारत ने डिफेंस एक्‍सपेंडिचर का रुख भी मोड़ा है. अब फाइटर जेट और नेवी वॉरशिप, सबमरीन आदि पर इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. फिलहाल इंडियन एयरफोर्स को स्‍टील्‍थ यानी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत है, जिसके लिए कई विकल्‍पों पर विचार किया जा रहा है. इस कमी को पूरा करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट को लॉन्‍च किया गया है. वहीं, दूसरी तरफ तात्‍कालिक तौर पर इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशी 5th जेन फाइटर जेट को खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है. अमेरिकी F-35 और रूसी Su-57 पर खास निगाहें हैं.

F-35 का खेल खत्‍म, Su-57 5th जेन जेट का होगा सरताज! अगर भारत कर दे यह गेमF-35 vs Su-57 5th Generation Jet: इंडियन एयरफोर्स 5th जेनरेशन फाइटर जेट के बेहतर विकल्‍प की तलाश में है. इसमें अमेरिकी F-35 और Su-57 रेस में है. (फाइल फोटो/Reuters)

F-35 vs Su-57 5th Generation Jet: आज के युग में यदि किसी भी देश को अपना प्रभुत्‍व स्‍थापित करना है तो उसके पास सुपीरियर एयर पावर होना बेहद जरूरी है. इसके लिए कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी की मदद से डेवलप फाइटर जेट एक अनिवार्य जरूरत है. 21वीं सदी के वॉरफेयर में पांचवीं पीढ़ी यानी स्‍टील्‍थ फाइटर एयरक्राफ्ट की मौजूदगी काफी अहम है. भारत ने देसी टेक्‍नोलॉजी से 5th जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. प्रोटोटाइप डिजाइन मॉडल तैयार करने के लिए ₹15000 करोड़ का फंड भी आवंट‍ित किया गया है. इस महत्‍वाकांक्षी प्रोजेक्‍ट में कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है और उसपर काम भी चल रहा है. पांचवीं पीढ़ी के देसी लड़ाकू विमान के एयरफोर्स में शामिल होने में 10 से 15 साल का वक्‍त लग सकता है. दूसरी तरफ, चीन 5th जेन जेट डेवलप कर चुका है और कहा जा रहा है कि बीजिंग ने 6th जेनरेशन फाइटर जेट पर आगे बढ़ रहा है. इससे भी बड़ी बात यह है कि पाकिस्‍तान अपने मित्र चीन से पांचवीं पीढ़ी का जेट हासिल करने में जुटा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो आने वाले कुछ साल या महीनों में पाकिस्‍तान एयरफोर्स के बेड़े में पांचवीं पीढ़ का जेट शामिल हो सकता है. यदि ऐसा होता है तो एशिया के सिक्‍योरिटी डायनामिक्‍स में महत्‍वपूर्ण बदलाव होगा और सामरिक संतुलन चीन-पाकिस्‍तान के पक्ष में हो जाएगा. सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की सीमा एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन से लगती है. तमाम हालात को देखते हुए भारत के लिए 5th जेनरेशन फाइटर जेट या स्‍टील्‍थ एयरक्राफ्ट हासिल करना जरूरी ही नहीं, बल्कि अनिवार्य हो चुका है. भारत इसके लिए मुख्‍य तौर पर दो विदेशी विकल्‍पों पर विचार कर रहा है. पहला, अमेरिकी F-35 और दूसरा रूसी Su-57 फाइटर जेट है. रुझान Su-57 की तरफ ज्‍यादा है. अब सिक्‍योरिटी एक्‍सपर्ट का मानना है कि यदि Su-57 में दो महत्‍वपूर्ण बदलाव कर दिए जाएं तो कॉम्‍बेट फील्‍ड में Su-57 अमेरिकी फिफ्थ जेन जेट F-35 को आउटक्‍लास कर सकता है.

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर Su-57 में भारत की स्वदेशी एवियोनिक्स और मिशन सॉफ्टवेयर को इंटीग्रेट किया जाए, तो यह लड़ाकू विमान अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II से भी बेहतर युद्धक क्षमता हासिल कर सकता है. यह आकलन भारतीय वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट और सैन्य विश्लेषक ग्रुप कैप्टन (रि.) डॉ. एमजे ऑगस्टीन विनोद ने किया है. उनके मुताबिक, रूस की उन्नत एयरफ्रेम इंजीनियरिंग और भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल क्षमताओं का मेल आधुनिक हवाई युद्ध की परिभाषा बदल सकता है. RT इंडिया से बातचीत में डॉ. विनोद ने इस इंटीग्रेशन को हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का बेहद शक्तिशाली मेल बताया है. उनका कहना है कि Su-57 की एवियोनिक्‍स श्रेष्ठता को अगर भारतीय मिशन कंप्यूटर, सेंसर फ्यूजन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से जोड़ा जाए, तो यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन सकता है जो न सिर्फ हवा में अधिक फुर्तीला हो, बल्कि डिजिटल युद्धक्षेत्र में भी निर्णायक बढ़त दिलाए.

Su-57 क्‍यों है खास?

यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय वायुसेना अपने फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या से जूझ रही है और स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के सेवा में आने तक के अंतराल को पाटने के विकल्प तलाश रही है. AMCA भारत की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा है, लेकिन इसके ऑपरेशन में आने में अभी समय लगेगा. ऐसे में अंतरिम समाधान के तौर पर गहन तकनीकी साझेदारी और को-डेवलपमेंट मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. डॉ. विनोद के मुताबिक, Su-57 का डिजाइन काइनेटिक डोमिनेंस पर आधारित है. इसमें थ्री-डायमेंशनल थ्रस्ट वेक्टरिंग इंजन, हाई-स्‍पीड और सुपरक्रूज क्षमता शामिल है, जिससे यह बिना आफ्टरबर्नर के सुपरसोनिक गति बनाए रख सकता है. यह गुण इसे क्‍लोज डॉगफाइट के साथ-साथ लंबी दूरी के संघर्षों में भी प्रभावी बनाते हैं. इसके विपरीत, अमेरिकी F-35 का मुख्य फोकस लो-ऑब्जर्वेबिलिटी यानी स्टील्थ और नेटवर्क सेंट्रिक युद्ध पर है. हालांकि, F-35 रडार से बचने में माहिर है, लेकिन इसकी गति और मैन्युवरबिलिटी रूसी प्लेटफॉर्म की तुलना में सीमित मानी जाती है.

F-35 vs Su-57 5th Generation Jet: एक्‍सपर्ट का मानना है कि कुछ तकनीकी बदलाव कर दिया जाए तो कॉम्‍बैट फील्‍ड में Su-57 अमेरिकी F-35 जेट को आउटक्‍लास कर सकता है. (फाइल फोटो/Reuters)

Su-57 में क्‍या हो बदलाव?

डॉ. विनोद का तर्क है कि अगर Su-57 में भारतीय सेंसर और सॉफ्टवेयर जोड़े जाएं, तो यह अपनी काइनेटिक बढ़त को बनाए रखते हुए डिजिटल क्षमताओं में भी बराबरी या उससे आगे निकल सकता है. इससे एक ऐसा संतुलित फाइटर बनेगा जो स्टील्थ, गति, फुर्ती और नेटवर्किंग क्षमताओं के मिश्रण के साथ युद्धक्षेत्र में अधिक घातक सिद्ध हो सकता है. भारतीय योगदान का सबसे अहम पहलू स्वदेशी एवियोनिक्स आर्किटेक्चर बताया जा रहा है. पिछले दो दशकों में भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठनों और लोकल इंडस्‍ट्री ने Su-30MKI, तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और राफेल जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए मिशन कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और सेंसर फ्यूजन तकनीक विकसित की है. आधुनिक भारतीय एवियोनिक्स बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर डिफाइंड हैं, जिससे नए हथियारों का इंटीग्रेशन, सिस्टम अपग्रेड और मिशन प्रोफाइल के अनुरूप कस्टमाइजेशन अपेक्षाकृत आसान हो जाता है. इसके विपरीत कई पश्चिमी प्लेटफॉर्म्स में यह क्षमताएं लॉक्ड रहती हैं, जिससे इस्‍तेमाल करने वाले देशों की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है. डॉ. विनोद के अनुसार, अगर रूसी मानक एवियोनिक्स को भारतीय मिशन कंप्यूटर और सेंसर सूट से बदला जाए, तो Su-57 न सिर्फ हवा में अधिक सक्षम बनेगा, बल्कि युद्धक्षेत्र के डिजिटल प्रबंधन में भी बढ़त हासिल करेगा. इससे यह प्लेटफॉर्म नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस, मल्टी-डोमेन युद्ध और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग में ज्यादा प्रभावी हो सकता है.

भारत के लिए क्‍यों है बेहतर?

भौगोलिक दृष्टि से भी यह इंटीग्रेशन भारत के लिए उपयोगी माना जा रहा है. भारतीय वायुसेना को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनल वातावरण में काम करना पड़ता है. हिमालय की ऊंची और थिन एयर वाले एयरबेस से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और स्ट्राइक मिशनों तक. Su-57 की ऊंचाई पर बेहतर प्रदर्शन क्षमता और लंबी रेंज, अगर भारतीय सॉफ्टवेयर से जुड़ जाए, तो यह स्थानीय खतरों के अनुरूप एक बेस्पोक समाधान दे सकता है, जो किसी ऑफ-द-शेल्फ प्लेटफॉर्म से अधिक उपयुक्त होगा. हालांकि, यह अवधारणा अभी सैद्धांतिक स्तर पर है, लेकिन यह भारत की रक्षा खरीद नीति में आए बदलाव को रेखांकित करती है. पहले जहां भारत बड़े पैमाने पर तैयार प्लेटफॉर्म खरीदने पर निर्भर रहता था, वहीं अब को-प्रोडक्‍शन, टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर और घरेलू क्षमताओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है. इससे पहले FGFA (फिफ्थ जेनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम से भारत का बाहर निकलना इस दिशा में एक अहम सबक साबित हुआ था. एकसपर्ट का मानना है कि भारत की एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर क्षमताएं अब इतनी मैच्‍योर हो चुकी हैं कि वे दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर एयरफ्रेम्स को भी और अधिक सक्षम बना सकती हैं. चाहे सुपर Su-57 कभी वास्तविकता बने या नहीं, यह चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि अल्‍ट्रा मॉडर्न वॉर सिस्‍टम्‍स डेवलप करने वाला देश बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें

Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

February 02, 2026, 06:19 IST

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