Last Updated:July 17, 2025, 11:13 IST
Odisha Bandh Live News: बालासोर की 20 वर्षीय छात्रा की मौत पर कांग्रेस समेत आठ विपक्षी दलों ने ओडिशा बंद का आह्वान किया है. राहुल गांधी ने इसे भाजपा के तंत्र की सुनियोजित हत्या करार दिया है.

Odisha Bandh: आज विपक्ष ने बंद का आह्वान किया है.
Odisha Bandh Live News: बालासोर घटना को लेकर आज ओडिशा बंद है. कांग्रेस समेत आठ विपक्षी राजनीतिक दलों ने बालासोर की 20 वर्षीय छात्रा की मौत के मामले में एकजुट होकर आज यानी 17 जुलाई को ‘ओडिशा बंद’ का आह्वान किया है. कांग्रेस की अगुवाई में विपक्ष राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और न्यायिक जांच की मांग कर रहा है. आज संयुक्त विपक्ष ओडिशा बंद रख रहा है. इससे पहले ओडिशा के बालासोर जिले में छात्रा की मौत के विरोध में विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने मंगलवार को बंद रखा था. इस दौरान बाजार, स्कूल-कॉलेज बंद रहे और अधिकतर वाहन सड़कों से नदारद दिखे.
Odisha Bandh Live News:
-कई जिलों में प्राइवेट और सरकारी बस सेवा प्रभावित होंगी.
-बाजार बंद रह सकते हैं.
-स्कूल और कॉलेज भी बंद को देखते हुए बंद हो सकते हैं.
-सरकारी दफ्तरों में छुट्टी नहीं है, मगर काम जरूर प्रभावित हो सकता है. क्या बंद नहीं होगा
-अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा
-अनिवार्य सेवा
-दूध-सब्जी की दुकानें
दरअसल, सोमवार को बालासोर स्थित फकीर मोहन स्वायत्त महाविद्यालय की 20 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी. उसने आत्मदाह का प्रयास किया था. अपने कॉलेज के विभागाध्यक्ष की ओर से कथित तौर पर लंबे समय तक यौन उत्पीड़न का सामना करने के बाद उसने खुद को आग लगा ली थी. औपचारिक शिकायत दर्ज कराने और प्राचार्य से मदद मांगने के बावजूद उसकी दलीलों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया, जिसके कारण यह दुखद घटना घटी. यह घटना फकीर मोहन (स्वायत्त) महाविद्यालय में हुई.
इस बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को इस मौत को भाजपा के तंत्र की ओर से सुनियोजित हत्या करार दिया और भाजपा पर पीड़िता की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया. राहुल गांधी ने लिखा,’ओडिशा में न्याय के लिए लड़ रही एक बेटी की मौत भाजपा के सिस्टम द्वारा की गई हत्या से कम नहीं है. उस बहादुर छात्रा ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन न्याय दिलाने के बजाय उसे धमकाया गया, प्रताड़ित किया गया और बार-बार अपमानित किया गया. जिन पर उसकी रक्षा करने की ज़िम्मेदारी थी, वे ही उसे तोड़ते रहे.’