US Afghanistan News: किसी का सगा नहीं US! जिन्होंने तालिबान से जंग में दिया था साथ, ट्रंप ने घटा दी उन अफगानियों की फंडिंग

2 hours ago

US President Donald Trump Cuts Funding for Afghan: अमेरिका भले ही खुद को दुनिया का सुपरपावर कहता हो लेकिन वह भरोसे के लायक देश बिल्कुल भी नहीं है. यह बात वहां की सरकारों ने बार-बार साबित की है. जिन अफगानियों ने अमेरिका के लिए तालिबान से लड़ने में अपने परिवार खपा दिए, अब उन्हें से यूएस ने मुंह मोड़ लिया है. अफगानिस्तान की खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अफ़ग़ान सहयोगियों के अमेरिका में रिलोकेशन और रिसेटलमेंट कार्यक्रमों के लिए जारी धन में कटौती कर दी है. इससे हजारों लोगों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है. 

हजारों अफगानियों की जान खतरे में पड़ेगी!

रिपोर्ट के मुताबिक, फंड में यह कटौती उन अफ़ग़ानों को प्रभावित करेगी, जिन्होंने तालिबान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना के साथ मिलकर अपनी जान जोखिम में डाली थी. 

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ट्रंप प्रशासन के इस फ़ैसले की वाशिंगटन में आलोचना हुई है. कांग्रेस मेंबर स्कॉट पीटर्स ने कहा कि फंड में यह कटौती भविष्य के साझेदारों को गलत संदेश देती है और एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में अमेरिका की प्रतिष्ठा को कमज़ोर करती है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जिन लोगों ने तालिबान के ख़िलाफ़ खड़े होने का साहस दिखाया, उनकी अमेरिका को रक्षा करनी चाहिए.

'अमेरिका विश्वसनीयता को बड़ा खतरा'

अमेरिकन सिविल सोसायटी समूहों ने भी ऐसी ही चिंताएं जाहिर की हैं. सैन डिएगो स्थित अफ़ग़ान इवैक इनिशिएटिव के प्रमुख शॉन वैनडाइवर ने आगाह किया कि अगर फंडिंग बंद हो जाती है, तो हज़ारों अफ़ग़ानों को गंभीर ख़तरे का सामना करना पड़ेगा, जिससे वे तालिबान के प्रतिशोध के शिकार हो जाएंगे.

अमेरिकी संसद कांग्रेस के आंकड़े बताते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में लगभग 60,000 अफ़ग़ान अभी भी शरण मामलों की समीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं. जबकि 1,70,000 से ज़्यादा लोग अभी भी विशेष आप्रवासी वीज़ा (SIV) के लिए कतार में हैं.

'करना पड़ सकता है विकट भविष्य का सामना'

अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से फंड रोके जाने पर आव्रजन वकीलों ने भी महिलाओं और लड़कियों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने चेतावनी दी है कि तालिबान शासन में वापसी से उनकी शिक्षा, रोज़गार और बुनियादी आज़ादी छिन सकती है. आलोचकों का तर्क है कि इन कटौतियों से न केवल अफ़ग़ान सहयोगियों को ख़तरा है, बल्कि दुनिया भर में अमेरिका के नैतिक अधिकार और विश्वसनीयता को भी कमज़ोर करने का भय है.

खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के वे हज़ारों लोग जो कभी अमेरिकी सेना के साथ खड़े थे, उन्हें बिना किसी सुरक्षित योजना के ऐसे अपने हाल पर छोड़ देना उनके जीवन को अनिश्चित और ख़तरनाक बना सकता है. इससे उन्हें भविष्य में विकट भविष्य का सामना करना पड़ सकता है.

बाइडेन प्रशासन पर बोला धावा

बता दें कि ट्रंप प्रशासन का यह फरमान तब सामने आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हफ़्ते की शुरुआत में अफ़ग़ानिस्तान में एबे गेट बम विस्फोट की चौथी बरसी पर एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए. उन्होंने उस दुखद दिन को याद करते हुए कहा कि यह घटना पिछली सरकार (बाइडेन प्रशासन) की वापसी योजना की अक्षमता को दर्शाती है.

(एजेंसी ANI)

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