Last Updated:August 29, 2025, 09:05 IST
Glorious Battle of MiG-21: आसमान में हुए दो धमाकों के बाद चाहे भारतीय सेना के जांबाज हों या पाकिस्तानी सैनिक, सभी सासें थाम कर आसमान की तरह निहार रहे थे. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि किसने किसका शिकार किया. अच...और पढ़ें

Glorious Battle of MiG-21: सरहद पर भारत और पाकिस्तान के बीच छिड़ी जंग अपने चरम पर थी. पूरब से पश्मिच तक भारतीय सेना हर दिन पाकिस्तान को शिकस्त का नया जख्म दे रही थी. इन जख्मों से बौखलाई पाकिस्तानी सेना कुछ भी करके इस बाजी को पटलने की कोशिश में लगा हुआ था. उस दिन भी पाकिस्तान के मंसूबे कुछ ऐसे ही थे. पाकिस्तान अपने मंसूबे के करीब भी पहुंचता, इससे पहले आसमान में एक जोरदार धमाका हुआ. इस धमाके को अभी तीन सेकेंड ही बीते थे, आसमान में एक और धमाका हुआ. तीन से चार सेकेंड के अंतराल में हुए इन धमाकों ने चाहे भारतीय हो या फिर पाकिस्तानी सभी की सांसें थाम दी थी. सभी को यह तो पता था कि आसमान में क्या हुआ, लेकिन इस बात का अंदाजा किसी को नहीं था कि किसने किसको यह गहरी चोंट दी है.
दरअसल यह घटना 12 दिसंबर 1971 की है. पश्चिमी मोर्चे पर सिंघ स्थिति पाकिस्तानी ठिकानों को नेश्तनाबूद करने के लिए भारतीय फाइटर जेट्स आसमान में उड़ान भर चुके थे. इन फाइटर जेट्स के मिशन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए 29वीं स्क्वाड्रन के मिग-21 सुपरसोनिक फाइटर जेट्स को बतौर एस्कॉर्ट भेजा गया था. उस दिन मिग-21 की कमान फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरुण कुमार दत्ता के हाथों में थी. प्लान के तहत, भारतीय एयरफोर्स के स्ट्राइकर फाइटर जेट पाकिस्तान में घुसकर तबाही मचाना शुरू कर चुके थे. इसी बीच, फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरुण कुमार दत्ता की नजर सामने से आ रहे पाकिस्तान के दो एफ-104 स्टार फाइटर पर पड़ी. पाकिस्तान के दोनों जेट्स की दिशा और स्पीड को देखकर फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता को समझ आ गया कि दोनों के निशाने पर भारतीय स्ट्राइक फोर्स है.
स्टार फाइटर से अकेले मोर्चा लेने बढ़ गए फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता
फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने तुरंत अपनी रणनीति तैयार की और अकेले दुश्मन के दो-दो एफ-104 से मुकाबले के लिए आगे बढ़ गए. चंद मिनटों के अंतराल के बाद फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने अपना मिग-21 पाकिस्तान के दोनों एफ-104 के पीछे लगा दिया. अब पाकिस्तान के दो एफ-104 और भारत का मिग-21 आमने सामने थे. पाकिस्तानी एयरफोर्स के दोनों एफ-104 ने पूरी ताकल लगा दी, लेकिन भारतीय मिग-21 का बाल भी बांका नहीं कर पाए. फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता के युद्धकौशल और मिग-21 की चपलता लगातार पाकिस्तानी स्टारफाइटर पर भारी पड़ रही थीं. आखिरकार पाकिस्तानी पायलट को समझ में आ गया कि अब रण छोड़कर भागने में ही उनकी भलाई है. एफ-104 के दोनों पायलट्स अपने-अपने स्टार फाइटर को बचाने के लिए रोलआउट किया और उल्टी दिशा में भागना शुरू कर दिया.
3 सेकेंड में मिग-21 की मिसाइलों ने आसमान में मचाया कोहराम
लेकिन, फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने आज कुछ और ही तय कर रखा था. उन्होंने दोनों एफ-104 का पीछा करना जारी रखा. सही निशाना मिलते ही फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने पहली मिशाइल दाग दी. तीन से चार सेकेंड के अंतराल में फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने अपने मिग-21 से दूसरी मिसाइल भी दाग दी. इसके बाद, आसमान में एक के बाद एक दो जोरदार धमाके हुए. धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि कुछ पलों के लिए न केवल दुश्मन, बल्कि भारतीय जांबाजों की सांसें भी धम गई थी. अभी तक किसी को समझ में नहीं आया था कि आसमान में किसने किसका शिकार किया. इसी बीच, भारतीय मिग-21 आग की लपटों को चीर कर बाहर आता हुआ दिखा. भारतीय एयरफोर्स के फ्लाइट लेफ्टिनेंट दत्ता ने अपने मिग-21 सुपरसोनिक फाइटर जेट से एक झटके में दोनों पाकिस्तानी एफ-104 को मार गिराया था.
अरब सागर में तैरता नजर आया पाकिस्तान का अमेरिकी ‘गुरूर’
मिग-21 को देखते ही जमीन पर भारतीय जांबाजों में खुशी की लहर दौड़ गई. वहीं पाकिस्तानी सेना को एक बार फिर गहरा जख्म मिला था. जिसके चलते उसके पास तिलमिलाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. इस मिशन को अंजाम देने के बाद भारतीय मिग-21 आसमान में दहाड़ते हुए आगे बढ़ गया, जबकि पाकिस्तान के दोनों एफ-104 के मलवे अरब सागर में तैरते हुए नजर आ रहे थे. 12 दिसंबर 1971 को हुए इस बैटल के बाद फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरुण कुमार दत्ता का नाम शीर्ष नायकों की लिस्ट में शामिल हो गया. इस बैटल में विजय के लिए फ्लाइट लेफ्टिनेंट अरुण कुमार दत्ता को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था.
Anoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें
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First Published :
August 29, 2025, 09:05 IST