Last Updated:August 06, 2025, 13:55 IST
Supreme Court News: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी आर गवई ने बुधवार को कहा कि 11 अगस्त से उनके कोर्ट में कोई भी वरिष्ठ वकील मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए उल्लेख नहीं कर सकेगा ताकि जूनियर वकी...और पढ़ें

हाइलाइट्स
सीजेआई गवई ने सीनियर वकीलों के लिए मेंशनिंग पर लगाई रोक.11 अगस्त से लागू होगा नियमअभिषेक मनु सिंघवी को भी आपत्ति नहीं.Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकीलों के लिए लक्ष्मण रेखा खांच दी है. चाहे कपिल सिब्बल हों या अभिषेक मनु सिंघवी, सीजेआई की अदालत में कोई भी उस लक्ष्मण रेखा को पार नहीं कर सकता. दरअल, सीजेआई यानी चीफ जस्टिस बी.आर. गवई ने साफ कर दिया कि अब से कोई भी सीनियर वकील किसी भी केस की सुनवाई के लिए उनकी अदालत में मेंशनिंग नहीं कर पाएगा. जी हां, प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई ने बुधवार को कहा कि 11 अगस्त से किसी भी सीनियर वकील को उनकी अदालत में तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी ताकि जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर मिल सके.
सीजेआई गवई ने 14 मई को शपथ ली थी. चीफ जस्टिस गवई ने वकीलों की ओर से मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए मामलों का मौखिक उल्लेख करने की प्रथा को फिर से शुरू कर दिया था और अपने पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना द्वारा अपनाई गई प्रथा को बंद कर दिया था. यह तब हुआ जब सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी एक मामले को सूचीबद्ध कराने के लिए उठे थे.
पूर्व सीजेआई खन्ना ने वकीलों की ओर से मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए मौखिक प्रस्तुतियों की प्रथा को बंद कर दिया था और उन्हें ईमेल या लिखित पत्र भेजने के लिए कहा था. इस पर CJI गवई ने कहा, ‘इस बात की बहुत मांग है कि सीनियर अधिवक्ताओं द्वारा किसी भी मामले का उल्लेख न किया जाए.’
उन्होंने अदालत के कर्मियों से एक नोटिस जारी करने को कहा कि सोमवार से किसी भी सीनियर वकील को उनकी अदालत में मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने और सुनवाई के लिए मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
चीफ जस्टिस ने कहा, ‘सोमवार से किसी भी वरिष्ठ वकील, यानी नामित सीनियर अधिवक्ता को मामलों का उल्लेख करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. जूनियर वकीलों को ऐसा करने का अवसर दिया जाना चाहिए.’ दरअसल, एक मामले का उल्लेख करने के लिए अदालत में मौजूद सीनयिर अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि अगर यह सभी वरिष्ठ वकीलों पर लागू होता है, उन्हें कोई समस्या नहीं है.
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘कम से कम मेरी अदालत में तो इसका पालन किया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि यह शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों पर है कि वे इस पद्धति को अपनाते हैं या नहीं. आमतौर पर वकील दिन की कार्यवाही की शुरुआत में मामलों की सूची बनाने और तात्कालिकता के आधार पर मामलों की सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अपने मामलों का उल्लेख करते हैं.
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...और पढ़ें
Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho...
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Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
August 06, 2025, 13:52 IST