Last Updated:April 17, 2025, 14:33 IST
Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में मामले सालों-साल तक लंबित रहते हैं. कई बार कोर्ट पर काम का दबाव तो कई बार डेट की कमी से आम जनता को न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं. मगर, मामले लंबित रहने में वकीलों का भी ...और पढ़ें

वकील की लापरवाही भरे जवाब पर क्या बोले जस्टिस पारदीवाला? (Photo- Bar&Bench)
हाइलाइट्स
वकील की अपर्याप्त तैयारी पर जस्टिस परदीवाला नाराज.सुप्रीम कोर्ट ने 6 महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया.6.5 साल में केवल 23 गवाहों की जांच हुई.Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है. दरअसल सुनवाई के दौरान वकील को अपने केस की जानकारी ही नहीं थी. क्रिमिनल केस जो पिछले 6.5 साल से कोर्ट में लंबित है, सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पॉर सुनवाई होनी थी. जस्टिस परदीवाला की बेंच थी. उन्होंने केस के बारे में वकील की अपर्याप्त तैयारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि वकील बिना तैयारी के रोजाना कोर्ट में चले आ रहे हैं. उन्होंने वकील को झाड़ लगाते हुए कहा, ‘मेरे सहयोगी धैर्य रखते हैं, लेकिन मैं कूल नहीं रह सकता हूं….’
चलिए बताते हैं कि पूरा मामला किया और कैसे घटित हुआ. दरअसल, मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस परदीवाला ने सवाल किया, ‘सेशन केस नंबर क्या है? आरोप कब तय किए गए? अपराध कब हुआ?’ वकील ने जवाब में सिर्फ इतना कहा- क्या है?, चार्जशीट दाखिल की गई…, हम्म…. वकील के इतने लापरवाही से जवाब देते हुए देख कर जस्टिस पारदीवाला भी भड़क गए. उन्होंने कहा कि वकील बिना किसी तैयारी के इस कोर्ट में रोज़ कैसे पेश हो सकते हैं? रोज़ हो रहा है!! मेरा भाई धैर्यवान है. मैं शांत नहीं रह सकता. संतोषजनक जवाब न देने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की।
कुछ यूं हुआ..
जस्टिस पारदीवाला: सत्र केस नंबर क्या है? एडवोकेट: क्या है? जस्टिस पारदीवाला: अच्छा! आरोप कब तय हुआ? एडवोकेट: चार्जशीट दाखिल की गई… जस्टिस पारदीवाला: मैं आरोप के बारे में पूछ रहा हूं- CHARGE… जस्टिस पारदीवाला: अपराध कब हुआ? एडवोकेट: Hmmm जस्टिस पारदीवाला: वकील बिना किसी तैयारी के इस कोर्ट में रोज़ कैसे पेश हो सकते हैं? ऐसा रोज़ हो रहा है!! मेरे साथी धैर्यवान हैं. मैं तो कूल नहीं रह सकता…
साढ़े छः साल में केवल 23 लोगों से पूछताछ
जस्टिस परदीवाला ने कहा कि 6.5 साल में केवल 23 गवाहों की जांच होना चिंताजनक है. उन्होंने कहा, ‘हम यह समझ नहीं पा रहे हैं कि इतने सालों में सिर्फ 23 गवाहों की जांच कैसे हुई. चाहे अपराध कितना भी गंभीर हो, आरोपी को तुरंत सुनवाई का अधिकार है. कोर्ट ने कई बार यह माना है कि अगर देरी आरोपी की वजह से नहीं है, तो उसे जमानत दी जा सकती है.
हालांकि, इस मामले में जमानत नहीं दी गई. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आखिरी मौका देते हुए 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी का आदेश दिया. कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ट्रायल पूरा नहीं हुआ, तो ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि 6 महीने बाद इस मामले की स्थिति की फिर से समीक्षा की जाए.
जस्टिस परदीवाला ने वकीलों की लापरवाही पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निचली अदालत को समयबद्ध तरीके से कार्यवाही पूरी करने का सख्त निर्देश दिया.
Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
April 17, 2025, 14:31 IST