ख्वाब पाले थे समंदर के, NDA ने राह दिखाई, अब बनेगी Navy की अफसर

1 month ago

Last Updated:July 17, 2025, 12:51 IST

UPSC NDA Success Story: बचपन की कल्पनाएं कभी-कभी हक़ीक़त बन जाती हैं. ऐसा ही सपना हरिनी राघवेंद्रन ने साकार किया, जिन्होंने NDA में चयन पाकर Indian Navy में अफसर बनने का गौरव पाया है.

ख्वाब पाले थे समंदर के, NDA ने राह दिखाई, अब बनेगी Navy की अफसर

UPSC NDA Success Story: NDA क्रैक करके राज्य की बनी पहली लड़की नेवी ऑफिसर

हाइलाइट्स

बचपन का सपना हुआ सचNDA में 279वीं रैंकराज्य की पहली बेटी Navy में अफसर बनेंगी

UPSC NDA Success Story: बचपन में अक्सर हम सभी ने कल्पनाओं की उड़ान भरते हुए कागज़ पर कुछ न कुछ चित्र बनाए होते हैं- कुछ अधूरे, कुछ बेहद खास. यही कल्पनाएं कभी-कभी हक़ीक़त का रूप भी ले लेती हैं. कुछ ऐसा ही हुआ हरिनी राघवेंद्रन (NDA Cadet Harini Raghavendran) के साथ. करीब चार साल पहले, हरिनी ने एक पुरानी नौका की क्रोशिया से बनी हुई एक सुंदर तस्वीर तैयार की थी, जिसमें वह नौका समुद्र की लहरों पर बहती हुई, हवा के झोंकों से दौड़ती प्रतीत होती थी. यह तस्वीर सिर्फ एक शौक़ भर नहीं थी, बल्कि उनके भीतर छिपे एक बड़े सपने की झलक भी थी. उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा था कि एक दिन वे वास्तव में ऐसे ही जहाज़ों पर सवार होकर समुद्र की लहरों को चीरती हुई एक नौसेना अधिकारी के रूप में देश की सेवा करेंगी.

आज वही हरिनी राघवेंद्रन भारतीय नौसेना की अधिकारी बनने की ओर चल दी हैं, जिन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में चयन पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि सपनों की शुरुआत कल्पनाओं से होती है, लेकिन उन्हें साकार करने के लिए मेहनत, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है.

तमिलनाडु की पहली लड़की जो बनी नौसेना कैडेट

आईटी प्रोफेशनल्स की 18 वर्षीय बेटी हरिनी अब इंडियन नेवल एकेडमी (INA), एझिमाला में शामिल होने वाली तमिलनाडु की पहली लड़की बन गई हैं. उन्होंने NDA/NA परीक्षा पास की, जो कक्षा 12वीं के बाद यूपीएससी के जरिए रक्षा सेवाओं में स्थाई कमीशन के लिए होती है. वह 14 जुलाई से चार साल की ट्रेनिंग के लिए एकेडमी चली गईं और ट्रेनिंग के अंत में बीटेक की डिग्री हासिल करेंगी.

UPSC परीक्षा से लेकर SSB तक: कठिन लेकिन गर्व भरी राह

चेन्नई के एक डिफेंस कोचिंग इंस्टिट्यूट से तैयारी करने के बाद हरिनी ने सितंबर 2024 में UPSC NDA परीक्षा पास कर 279वीं रैंक पाई. इसके बाद उन्होंने सेवा चयन बोर्ड (SSB) द्वारा लिए गए पांच चरणों वाले कठिन चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें साइकोलॉजी टेस्ट, इंटरव्यू और मेडिकल जांच शामिल थे. हरिनी के अनुसार मेडिकल जांच सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था. टीआईओ के अनुसार वह बताती हैं कि आपके शरीर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं बचता जिसकी जांच न होती हो. इस दौरान कई उम्मीदवारों को पहले से अज्ञात बीमारियां भी पता चल जाती हैं.

बचपन से खेलों और पानी से जुड़ाव

हरिनी ने महज़ पांच साल की उम्र में तैराकी शुरू कर दी थी. बाद के वर्षों में उन्होंने एथलेटिक्स और बास्केटबॉल में भी हाथ आजमाया और अपनी स्कूल टीम को कई बार जीत दिलाई. वह कहती हैं कि फिजिकल एक्टिविटीज से जुड़ाव और रोमांच उनकी आदत में रहा है. उनके पिता राघवेंद्रन वेंकटरमण के साथ उन्होंने किशोरावस्था से ही साहसिक यात्राएं शुरू कर दी थीं. उनकी मां राम्या आर. ने भी बेटी की स्पोर्ट्स एक्टिविटीज को देखते हुए घर तक बदल दिया ताकि उसे बास्केटबॉल प्रशिक्षण मिल सके.

राज्य में जागरूकता की कमी, लेकिन उम्मीद जिंदा

हरिनी के मार्गदर्शक मेजर माधवन कुमार मानते हैं कि तमिलनाडु जैसे राज्यों में रक्षा क्षेत्र को लेकर जागरूकता अभी भी कम है, ख़ासकर लड़कियों के बीच. सैनिक स्कूल, अमरावतीनगर में गेस्ट स्पीकर के रूप में अनुभव साझा करते हुए हरिनी कहती हैं कि अगर मेरी कहानी किसी और को भी इस राह पर चलने की प्रेरणा दे सके, तो यह मेरे लिए बड़ी उपलब्धि होगी.

Munna Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin...और पढ़ें

पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव. दूरदर्शन, ज़ी मीडिया और News18 के साथ काम किया है. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत दूरदर्शन दिल्ली से की, बाद में ज़ी मीडिया से जुड़े और वर्तमान में News18 Hin...

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