हमारे चेहरे के हाव-भाव सिर्फ हमारी भावनाएं नहीं दिखाते बल्कि शरीर और दिमाग पर भी असर डालते हैं। जब हम खुश होते हैं तो चेहरे पर मुस्कान आती है वहीं गुस्सा आने पर माथे पर बल पड़ जाते हैं और जबड़े कस जाते हैं। मनोवैज्ञानिक पॉल एकमैन ने अपनी रिसर्च में चेहरे के हाव-भाव और भावनाओं के बीच रिलेशन को समझाया है।
जब मन खुश होता है
1. चेहरे पर आती है मुस्कान: जब हम दिल से खुश होते हैं तो हमारी आंखों के आसपास की मांसपेशियां भी सिकुड़ती हैं। इस तरह की मुस्कान को साइंस में 'डुचेन स्माइल' कहा जाता है। इसे सच्ची खुशी से जुड़ी मुस्कान माना जाता है।
2. आवाज और मूड पर असर: खुश रहने पर हम अक्सर शांत होकर बात करते हैं और हमारी आवाज में नरमी नजर आ सकती है। खुशी के दौरान दिमाग में डोपामाइन और एंडोर्फिन जैसे केमिकल्स भी अहम भूमिका निभाते हैं जो हमारे मूड और अच्छा महसूस करने से जुड़े हैं।
जब हमें गुस्सा आता है
1. चेहरे और शरीर में बदलाव: गुस्सा आने पर भौहें सिकुड़ सकती हैं, माथे पर बल पड़ जाते हैं और जबड़े कस जाते हैं। कई बार हाथों की मुट्ठियां भी अपने आप भिंच जाती हैं। ये बदलाव शरीर की तनाव से जुड़े रिएक्शन का हिस्सा हैं।
2. दिमाग पर पड़ता है असर: गुस्से के दौरान शरीर का 'फाइट या फ्लाइट' सिस्टम एक्टिव हो सकता है। यानी शरीर किसी खतरे का सामना करने या उससे दूर जाने के लिए तैयार होने लगता है। इस दौरान दिल की धड़कन तेज हो सकती है और तनाव बढ़ सकता है। बहुत ज्यादा गुस्से में शांत होकर सोचना और सही फैसला लेना भी मुश्किल हो सकता है।
मुस्कुराना क्यों है जरूरी
मनोविज्ञान की 'फेशियल फीडबैक थ्योरी' कहती है कि सिर्फ खुश होने पर ही मुस्कान नहीं आती बल्कि मुस्कुराने से भी हम खुश महसूस कर सकते हैं। जब हम तनाव में भी थोड़ा मुस्कुरा देते हैं तो दिमाग को लगता है कि 'सब सेफ है' और वह तुरंत स्ट्रेस हॉर्मोन (कोर्टिसोल) का लेवल गिराकर 'फील-गुड' हॉर्मोन्स रिलीज करने लगता है। गुस्सा एक इमरजेंसी अलार्म है; अगर यह हर बात पर बजने लगे तो शरीर और दिमाग दोनों अंदर से थक जाते हैं। इसलिए गुस्सा आने पर तुरंत रिएक्ट करने के बजाय गहरी सांस लें और चेहरे की मांसपेशियों को रिलैक्स करें। आपका शांत चेहरा, आपके उबलते हुए दिमाग को खुद-ब-खुद शांत होने का सिग्नल दे देगा।

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