दिन भर की थकान और स्ट्रेस के बाद घर लौटने पर जब आपका डॉग पूंछ हिलाते हुए आपका वेलकम करता है तो मन को एक अलग ही सुकून मिलता है। अब साइंस ने भी साबित कर दिया है कि अपने डॉग को सहलाना केवल खुशी ही नहीं देता बल्कि आपके शरीर को फ्यूचर की मुश्किलों और तनाव से लड़ने के लिए भी तैयार करता है। कैसे यहां जानिए...
यह कहती है नई रिसर्च
यूनिवर्सिटी ऑफ इंसब्रुक के रिसर्चर्स ने 64 डॉग ओनर्स और उनके पेट्स पर एक स्टडी की ताकि यह समझा जा सके कि फिजिकल टच का दिमाग और शरीर पर क्या असर होता है। इस स्टडी में लोगों को तनाव देने वाले दो कठिन टास्क (मेंटल मैथ्स और नॉलेज क्विज) दिए गए। रिसर्च का सबसे हैरान करने वाला नतीजा यह था कि स्ट्रेसफुल काम के तुरंत बाद डॉग को सहलाने से हार्ट रेट या ब्रेन वेव्स तुरंत नॉर्मल नहीं हुए। लेकिन इसका असली फायदा तब दिखा जब लोगों को दोबारा दूसरा स्ट्रेसफुल टास्क दिया गया। जिन लोगों ने ब्रेक के दौरान अपने डॉग को प्यार से सहलाया था उनके शरीर ने अगले स्ट्रेस का सामना बहुत शांति से किया। उनका बायोलॉजिकल स्ट्रेस रिस्पॉन्स काफी कमजोर था और दिमाग में शांति देने वाली 'अल्फा-वेव' एक्टिविटी ज्यादा दर्ज की गई।
सिर्फ देखना काफी नहीं 'टच' है जरूरी
इस स्टडी ने यह क्लियर कर दिया कि केवल डॉग को देखना या उससे बात करना शरीर को उतना फायदा नहीं पहुंचाता। जब आप उन्हें फिजिकली टच करते हैं तो यह शरीर के लिए एक 'बफर' या सेफ्टी कवच का काम करता है जो आपको अगली चुनौती के लिए तैयार कर देता है।
पेट पेरेंट्स के लिए काम की टिप्स
मीटिंग से पहले पेटिंग: अगर आपको कोई मुश्किल काम शुरू करना है या किसी स्ट्रेसफुल मीटिंग में जाना है तो उससे पहले 5 मिनट अपने डॉग को सहलाएं. यह आपके शरीर को आने वाले स्ट्रेस के खिलाफ मजबूत बनाएगा।
फिजिकल कांटेक्ट बढ़ाएं: सिर्फ दूर से कमांड देना या बात करना काफी नहीं है। जब भी मौका मिले अपने डॉग को गले लगाएं या पास बिठाकर सहलाएं।
ब्रेक टाइम को बनाएं पेट टाइम: वर्क-फ्रॉम-होम के दौरान अपनी टी-ब्रेक में डॉग के साथ फिजिकल इंटरेक्शन करें। यह आपके कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ और मेंटल पीस दोनों के लिए एक बेहतरीन और साइंटिफिक थेरेपी है।

1 hour ago
