आजकल शादी के कुछ महीने बाद भी अगर प्रेग्नेंसी नहीं होती तो कई कपल सबसे पहले आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं। इंटरनेट, सोशल मीडिया और गूगल पर मिलने वाली जानकारी की वजह से लोगों को एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर कपल को शुरुआत में आईवीएफ की जरूरत नहीं होती। कई बार सही इलाज और लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से भी अच्छी खबर मिल सकती है। ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी स्पेशलिस्ट डॉ। कंचन मिश्रा कहती हैं कि आईवीएफ उन कपल्स के लिए बड़ी उम्मीद है जिनके लिए बाकी इलाज काम नहीं करते। लेकिन इसे पहला नहीं बल्कि आखिरी विकल्प मानना चाहिए।लगता है कि यही सबसे अच्छा और सबसे तेज तरीका है। लेकिन
पहले जांच कराएं फिर इलाज चुनें
पिछले कुछ सालों में आईवीएफ तकनीक काफी आगे बढ़ी है। नई तकनीक और एआई की मदद से इसकी सफलता दर भी पहले से बेहतर हुई है। 35 साल से कम उम्र की महिलाओं में जहां पहले सफलता दर करीब 20 से 30 % मानी जाती थी, वहीं अब कई मामलों में यह 50 से 60 % तक पहुंच गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर कपल को सीधे आईवीएफ करवाना चाहिए। कई बार समस्या बहुत छोटी होती है, जिसका इलाज दवाइयों, सही समय पर ओव्यूलेशन कराने या दूसरी आसान मेडिकल प्रोसेस से हो सकता है। इसलिए सबसे पहले किसी रजिस्टर्ड स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलना जरूरी है।
आईवीएफ आसान नहीं पूरी तैयारी मांगता है
आईवीएफ एक मॉडर्न और असरदार टेक्निक जरूर है लेकिन यह लंबी और धैर्य वाला प्रोसेस है। इसमें कई जांचें, दवाइयां और इंजेक्शन लेने पड़ते हैं। इलाज के दौरान डॉक्टर की नियमित निगरानी भी जरूरी होती है। कई बार एक बार में सफलता नहीं मिलती और दो या उससे ज्यादा आईवीएफ साइकल करवाने पड़ सकते हैं। इससे मेंटल स्ट्रेस के साथ आर्थिक बोझ भी बढ़ सकता है।
इसके अलावा आईवीएफ के दौरान कुछ जटिलताओं का खतरा भी रहता है। इनमें मल्टीपल प्रेग्नेंसी, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, जेस्टेशनल डायबिटीज, ओवेरियन हाइपरस्टिम्यूलेशन सिंड्रोम (OHSS), प्री-एक्लेम्प्सिया, गैस, ब्लोटिंग, मूड स्विंग्स और वजन बढ़ना जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि हर महिला को ये दिक्कतें हों ऐसा जरूरी नहीं है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
आईवीएफ से पहले ये ऑप्शन भी हैं
- अगर एक साल तक नियमित कोशिश के बाद भी गर्भधारण नहीं होता तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले डॉक्टर जरूरी जांच कराते हैं ताकि समस्या की असली वजह पता चल सके। इसके बाद अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता बेहतर करने वाली दवाइयां दी जा सकती हैं।
- जरूरत पड़ने पर आईयूआई (IUI) या लैप्रोस्कोपी जैसी कम जटिल प्रोसेस की मदद भी ली जाती है। कई कपल्स को इन्हीं तरीकों से सक्सेज मिल जाती है और उन्हें आईवीएफ तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
अच्छी लाइफस्टाइल भी बढ़ाती है उम्मीद
हेल्दी लाइफस्टाइल गर्भधारण की संभावना बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। रोजाना हल्की एक्सरसाइज करें, संतुलित और पौष्टिक खाना खाएं, वजन को कंट्रोल में रखें और पर्याप्त नींद लें। जंक फूड, धूम्रपान, शराब और दूसरे नशों से दूरी बनाएं। साथ ही प्लास्टिक के बर्तनों में गर्म खाना खाने और जरूरत से ज्यादा केमिकल वाले कॉस्मेटिक्स के इस्तेमाल से भी बचें। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि आईवीएफ असफल होने के बाद सिर्फ लाइफस्टाइल में सुधार करने से नेचुरली रूप से गर्भधारण हो जाता है। इसलिए अगर प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ रही है तो जल्दबाजी में आईवीएफ का फैसला न लें। सही समय पर डॉक्टर से सलाह, सही जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर कई कपल बिना आईवीएफ के भी पेरेंट्स बनने का सपना पूरा कर सकते हैं।
डॉ। कंचन मिश्रा (एमबीबीएस, डीजीओ, पीजीडीएस)
ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी स्पेशलिस्ट, डायरेक्टर
जगदीश ईएनटी एंड मैटरनिटी क्लिनिक, प्रयागराज
पूर्व चिकित्सक, डफरिन अस्पताल, प्रयागराज और सचिव, अथर्वन फाउंडेशन

1 hour ago
