रात के खाने के बाद मीठा खाना, फोन पर समय बिताना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी आज बच्चों की लाइफस्टाइल का नॉर्मल पार्ट है। यही आदतें धीरे-धीरे बचपन के मोटापे का कारण बन सकती हैं। यह समस्या एक दिन में नहीं होती और न ही इसका सॉल्यूशन सिर्फ दवा तक सीमित है। इसी चैलेंज को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इस महीने बच्चों और टीनएजर्स में मोटापे से निपटने के लिए पहली बार नई ग्लोबल गाइडलाइन्स जारी की हैं।
यह कहती है WHO की नई गाइडलाइन
WHO का साफ कहना है कि बचपन के मोटापे को कम करने के लिए सर्जरी या वजन घटाने वाली दवाइयों को 'डिफॉल्ट' या पहला ऑप्शन नहीं माना जा सकता। इसके बजाय 0 से 19 साल के बच्चों के लिए डाइट, फिजिकल एक्टिविटी, व्यवहार में बदलाव और परिवार के पूरे सपोर्ट पर जोर दिया गया है।
- 0-9 साल के बच्चे: WHO ने छोटे बच्चों के लिए वजन घटाने वाली दवाइयों या सर्जरी (Bariatric Surgery) की सख्त मनाही की है क्योंकि इनके लंबे समय तक सेफ रहने के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
- 10-19 साल के टीनएजर्स : अगर लंबे समय तक लाइफस्टाइल प्रोग्राम्स और एक्सरसाइज से फायदा नहीं होता तभी डॉक्टरों की सख्त निगरानी में दवाइयां या गंभीर मामलों में सर्जरी पर विचार किया जा सकता है।
आंकड़े हैं डराने वाले
- WHO के मुताबिक 2024 में दुनियाभर में 5 से 19 साल के लगभग 40 करोड़ बच्चे और यंग एडल्ट्स ओवरवेट थे जिनमें से 17 करोड़ मोटापे के शिकार हैं। 1990 से 2024 के बीच बच्चों में मोटापे का यह परसेंट 2% से बढ़कर 8% हो गया है।
- इंडिया की बात करें तो नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) 2019-21 के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में ओवरवेट होने की दर 3।4% हो गई है जो NFHS-3 (2005-06) में मात्र 1।5% थी। यह समस्या सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, रूरल एरियाज में भी 3।2% बच्चे इसका शिकार हो रहे हैं।
आपके के लिए WHO गाइडलाइन्स का मतलब
भारत में बच्चों का पूरा रूटीन उनके स्कूल, ट्यूशन, लंबे सफर, घर में बनने वाले खाने और स्क्रीन टाइम से तय होता है। ऐसे में WHO की इन गाइडलाइन्स को आम जिंदगी में कैसे उतारा जाए? यहां कुछ आसान और प्रैक्टिकल टिप्स दिए गए हैं:
1. मीठे ड्रिंक्स को कहें 'बाय-बाय': प्यास लगने पर बच्चे को पैक्ड जूस, कोला या शुगर ड्रिंक्स देने के बजाय पानी, छाछ, नींबू पानी या नारियल पानी दें। WHO भी मीठे ड्रिंक्स की जगह पानी और मिठाइयों की जगह फल या सब्जियां देने की सलाह देता है।
2. सब कुछ बैन न करें: बच्चों के लिए चिप्स, कुकीज या मिठाइयों को पूरी तरह बंद करने से उनमें चोरी-छिपे खाने की आदत बढ़ सकती है। इसके बजाय इन्हें 'कभी-कभार' खाने वाले स्नैक्स की लिस्ट में डालें।
3. कम से कम 60 मिनट की एक्टिविटी: WHO के मुताबिक बच्चों को रोज कम से कम 1 घंटा फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए। इसमें साइक्लिंग, बैडमिंटन, डांसिंग, रस्सी कूदना या स्कूल तक पैदल जाना शामिल हो सकता है।
4. स्क्रीन टाइम को सजा न बनाएं: फोन या टीवी छीनने से बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं। इसकी जगह खाने के समय को 'स्क्रीन-फ्री जोन' बनाएं। सोने से पहले मोबाइल बंद कर दें और खाली समय में परिवार के साथ वॉक या इनडोर गेम्स खेलें।
5. नींद और खाने का समय फिक्स करें: रात में देर तक जागने और देर से खाना खाने से भूख और हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है। अच्छी नींद मोटापे को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती है।
6. बच्चों को फैसलों में शामिल करें: उन्हें अपनी पसंद का कोई एक हेल्दी स्नैक या कोई एक खेल चुनने दें। थोपे गए नियमों से ज्यादा बच्चे आपसी सहमति वाले नियमों को मानते हैं।
7. मेंटल हेल्थ पर दें ध्यान: अक्सर बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी, बुलीइंग या लो-सेल्फ एस्टीम के कारण स्ट्रेस में आकर ज्यादा खाने (Emotional Eating) लगते हैं। अगर बच्चा चुप-चुप रहता है तो उससे बात करें और जरूरत पड़ने पर काउंसलर की मदद लें।
पेरेंट्स क्या न करें
- बच्चों को बड़ों वाली क्रैश डाइट पर न रखें।
- उनके वजन को लेकर कभी उन्हें शर्मिंदा न करें या पब्लिक में मजाक न बनाएं।
- वजन कम करने वाले सप्लीमेंट्स या 'फैट-बर्निंग' चाय का इस्तेमाल बच्चों पर भूलकर भी न करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी दवाइयों की ओर न भागें।

1 hour ago
