Last Updated:August 29, 2025, 07:09 IST
Donald Trump India Tariff: अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार की ओर से भारत पर लगाए गए 50 फीसद टैरिफ के खिलाफ अब वेस्टर्न वर्ल्ड भी नई दिल्ली के समर्थन में आ गया है. ट्रंप प्रशासन के कदम को आत्मघाती तक बताया ज...और पढ़ें

Donald Trump India Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रोडक्ट पर कुल मिलाकर 50 फीसद टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. ऐसे में अमेरिका के बाजार में जो भारतीय प्रोडक्ट 100 रुपये में मिल रहा था, अब उसकी कीमत सीधे 150 रुपये तक पहुंच गई है, ऐसे में भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर पर असर पड़ना स्वभाविक है. इन सबके बीच ट्रंप का यह विनाशकारी कदम भारत के लिए वरदान भी साबित हो सकता है. वेस्टर्न वर्ल्ड के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से भारत के सुपर पावर बनने का रास्ता भी खुल सकता है. साथ ही इन विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारत पर 50 फीसद टैरिफ लगाकर ट्रंप सरकार द्विपक्षीय संबंधों को खाक में मिला रहे हैं, जिसे दशकों के प्रयास से एक मुकाम तक पहुंचाया गया.
अमेरिका और भारत के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से भारत पर आक्रामक रुख अपनाने के संकेतों के बीच पश्चिमी थिंक-टैंक और विशेषज्ञ खुलकर नई दिल्ली का पक्ष ले रहे हैं. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को यूरोप से अपील की कि वह वॉशिंगटन के साथ मिलकर भारत पर टैरिफ बढ़ाए. एक टेलीविजन इंटरव्यू में उन्होंने शिकायती लहजे में कहा था, ‘मुझे नहीं दिखता कि यूरोपीय देश भारत को धमकी देकर टैरिफ लगा रहे हैं. हमें उनकी मदद की जरूरत है.’ यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर बातचीत चल रही है.
‘ट्रंप पीछे हटने वाले नहीं’
बेसेंट ने हालांकि कहा कि भारत और अमेरिका लोकतांत्रिक मूल्यों और बाजार के कारण साथ आएंगे, लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया कि टैरिफ मसले पर ट्रंप पीछे हटने वाले नहीं हैं. बता दें कि इस मसले पर ट्रंप खुद चुप्पी साधे हैं, जबकि उनके सहयोगी लगातार भारत पर हमलावर बने हुए हैं. इसी क्रम में ट्रंप प्रशासन ने वीजा नियम भी सख्त कर दिए हैं, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय छात्र और पेशेवर हो रहे हैं. पिछले 25 सालों से चले आ रहे अमेरिका-भारत संबंधों की मजबूती को कमजोर करने की इस कोशिश की आलोचना कई रणनीतिक विशेषज्ञों ने की है. कार्नेगी एंडोमेंट से जुड़े और पूर्व अमेरिकी राजनयिक इवान फेगेनबाम ने कहा, ‘यूक्रेन युद्ध पुतिन की जंग है, मोदी की जंग नहीं. जो लोग ऐसा सोचते हैं, वे हकीकत से कटे हुए हैं. यह सीधे तौर पर संबंधों खराब करना है.’ उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अमेरिकी अधिकारी जानबूझकर रिश्तों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
आत्मघाती कदम
ब्रिटिश पत्रिका The Economist ने भी डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को अमेरिका के लिए आत्मघाती कदम करार दिया है. पत्रिका में छपे लेख में कहा गया कि पाकिस्तान को गले लगाकर और भारत से दूरी बनाकर अमेरिका अपनी ही रणनीतिक बढ़त खो रहा है. पत्रिका ने यह भी बताया कि रूस से सस्ता तेल खरीदने में भारत को निशाना बनाना दोहरा मापदंड है, क्योंकि चीन समेत कई अन्य देश भी ऐसा कर रहे हैं और भारत उस तेल को यूरोप को परिष्कृत उत्पादों के रूप में बेचता है. लेफ्ट आइडियोलॉजी के इकोनोमिस्ट रिचर्ड वोल्फ ने चेतावनी दी कि अमेरिका का आक्रामक रुख उल्टा असर डाल सकता है. उन्होंने कहा, ‘भारत अब अपने निर्यात अमेरिका को नहीं, बल्कि बाकी ब्रिक्स देशों को करेगा. इससे ब्रिक्स और ज्यादा एकजुट होकर पश्चिम का आर्थिक विकल्प बन जाएगा.’ कुल मिलाकर ट्रंप सरकार की नीतियां भारत-अमेरिका रिश्तों को नई चुनौती के दौर में धकेल रही हैं, लेकिन वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत के लिए अवसर भी है एक उभरती महाशक्ति के रूप में खुद को साबित करने का.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...और पढ़ें
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु...
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Location :
New Delhi,Delhi
First Published :
August 29, 2025, 07:09 IST