मरे हुए रिश्ते को जिंदा रखना ठीक नहीं... SC ने पति-पत्नी को दी तलाक की मंजूरी

1 month ago

Last Updated:July 17, 2025, 13:24 IST

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से अलग रह रहे जोड़े को तलाक दिया. कोर्ट ने कहा, मरे हुए रिश्ते को जिंदा रखना ठीक नहीं. सम्मान और साथ खत्म हो जाए, तो शादी का कोई मतलब नहीं रह जाता.

मरे हुए रिश्ते को जिंदा रखना ठीक नहीं... SC ने पति-पत्नी को दी तलाक की मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को लेकर बड़ी टिप्पणी की. (सांकेतिक तस्‍वीर)

हाइलाइट्स

सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल से अलग रह रहे जोड़े को तलाक दिया.कोर्ट ने मरे हुए रिश्ते को ज़बरदस्ती निभाने से किया इनकार.झूठे उत्पीड़न केस में पति और परिवार को कोर्ट ने बरी किया.

अगर कोई शादी सिर्फ नाम की रह जाए, जिसमें ना प्यार बचे, ना सम्मान और ना ही साथ रहने की गुंजाइश- तो क्या उसे जबरदस्ती निभाना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट का जवाब है-“नहीं.” देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक ऐसे शादीशुदा जोड़े को तलाक की इजाजत दी है, जो पिछले 16 साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे. कोर्ट ने कहा कि जब पति-पत्नी एक छत के नीचे नहीं रह पा रहे और उनके बीच सुलह की कोई उम्मीद भी नहीं बची, तो उन्हें ज़बरदस्ती शादी में बांधना न तो उनके लिए ठीक है, न समाज के लिए.

एक साल भी साथ नहीं रह पाए
इस केस की शुरुआत साल 2008 में हुई थी, जब दिल्ली में एक जोड़े की शादी हिन्दू रीति-रिवाज़ों के साथ हुई. शादी के बाद कुछ महीनों तक सब ठीक चला, लेकिन फिर दोनों के बीच मनमुटाव शुरू हो गया. बात इतनी बिगड़ गई कि अक्टूबर 2009 में दोनों ने अलग-अलग रहना शुरू कर दिया. इसके बाद पति ने 2010 में तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी लगाई.

लेकिन ये कानूनी लड़ाई इतनी आसान नहीं थी. फैमिली कोर्ट ने पति की अर्जी को 2017 में खारिज कर दिया. फिर पति दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, मगर वहां भी 2019 में राहत नहीं मिली. हाईकोर्ट ने भी तलाक देने से मना कर दिया.

पत्नी ने भी लगाए आरोप
पति के खिलाफ सिर्फ तलाक की ही लड़ाई नहीं थी, बल्कि पत्नी ने पति और उसके परिवार के खिलाफ घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का केस भी दर्ज कराया था. लेकिन जांच और कोर्ट की सुनवाई के बाद ये केस झूठा साबित हुआ और पति व उसके परिवार को कोर्ट से बरी कर दिया गया.इस सबके बावजूद, दोनों के बीच दूरी लगातार बढ़ती गई और अब हालात ये हो गए थे कि दोनों का एक-दूसरे से कोई संपर्क तक नहीं था.

कोर्ट ने कहा- अब इस रिश्ते में कुछ नहीं बचा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि शादी सिर्फ एक कानूनी कागज़ नहीं होती, बल्कि वो दो लोगों के बीच सम्मान, भरोसे और साथ का रिश्ता होता है. जब ये सब खत्म हो जाए और रिश्ते में सिर्फ नफरत, झगड़े और कोर्ट-कचहरी की लड़ाई बच जाए, तो उस शादी को ज़बरदस्ती ज़िंदा रखना बेकार है. कोर्ट ने ये भी कहा कि इस तरह की शादी सिर्फ मानसिक तनाव बढ़ाती है और समाज पर भी बोझ बनती है.

दोनों ने जवानी के 16 साल इसी झगड़े में गवा दिए
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दोनों पक्षों ने अपने जीवन के सबसे कीमती साल, यानी जवानी के 16 साल, सिर्फ कोर्ट-कचहरी में एक-दूसरे से लड़ते हुए बर्बाद कर दिए. अब भी अगर उन्हें एक शादी के नाम पर साथ रहने को मजबूर किया जाएगा, तो इससे सिर्फ नफरत और बढ़ेगी, कोई समाधान नहीं निकलेगा.

आर्टिकल 142 के तहत तलाक की मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 का इस्तेमाल करते हुए पति को तलाक की मंजूरी दी. इस अनुच्छेद के तहत कोर्ट को यह विशेष अधिकार है कि वह किसी मामले में पूरी तरह से न्याय कर सके, भले ही दूसरे कानूनी रास्ते बंद हो चुके हों.

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