इरम (इंटरनेट डेस्क) । किसी से प्यार होने के लिए कभी लंबी बातचीत, एक मुलाकात या दोस्तों की छोटी-सी मदद ही काफी होती थी. फिर डेटिंग ऐप्स आए और किसी नए इंसान से मिलने का तरीका पूरी तरह बदल गया। प्रोफाइल देखिए, पसंद आए तो स्वाइप कीजिए और मैच होने पर बातचीत शुरू कर दीजिए। प्यार की तलाश जैसे कुछ सेकंड के फैसले में बदल गई।
लेकिन अब यही तेज रफ्तार कई लोगों को थकाने लगी है। लगातार प्रोफाइल देखना, नए मैच का इंतजार करना, बातचीत शुरू करके कुछ दिनों में उसका खत्म हो जाना और फिर नए व्यक्ति की तलाश शुरू करना- डेटिंग का यह सिलसिला अब उतना रोमांचक नहीं रह गया है। ऐसे में सवाल है कि क्या लोग अब डेटिंग का कोई ज्यादा आसान और सच्चा तरीका चाहते हैं ?
स्वाइप करते-करते थक चुके हैं लोग
डेटिंग ऐप्स ने लोगों के लिए नए लोगों से मिलना आसान जरूर किया, लेकिन इसके साथ आप्शन भी बहुत बढ़ गए। एक प्रोफाइल पसंद नहीं आई तो तुरंत दूसरी प्रोफाइल सामने होती है। कई बार लोग किसी को समझने से पहले ही उसके रूप, काम, उम्र या कुछ पसंद-नापसंद के बेस पर फैसला कर लेते हैं।
इसका असर रिश्तों पर भी पड़ सकता है। जब हर समय कोई नया ऑप्शन मौजूद हो, तो किसी एक पर्सन को समय देना मुश्किल हो जाता है। छोटी-सी कमी दिखाई दी नहीं कि मन में आता है- शायद अगला मैच इससे बेहतर होगा। इसी वजह से अब कुछ लोग डेटिंग को थोड़ा धीरे आगे बढ़ाना चाहते हैं।
मैच से ज्यादा कनेक्शन जरूरी
किसी को पसंद करना और उसके साथ अच्छा रिश्ता बनना दो अलग बातें हैं। डेटिंग ऐप की प्रोफाइल में छोटी-सी जानकारी और कुछ पसंद-नापसंद होती हैं। लेकिन किसी की असली सोच का पता बातचीत और मुलाकात के बाद ही चलता है।
कई बार जिस पर्सन की प्रोफाइल पहली नजर में खास नहीं लगती, लेकिन आमने-सामने की बातचीत बहुत अच्छी होती है। वहीं किसी की शानदार प्रोफाइल के बावजूद मुलाकात के बाद महसूस हो सकता है कि दोनों के बीच कोई तालमेल नहीं है।
यही वजह है कि अब डेटिंग में बातचीत, समझ और सहजता को ज्यादा इंपॉर्टेंस दी जा रही है।
धीरे-धीरे रिश्ते बनाने की चाह
हर मुलाकात को तुरंत रिश्ते का नाम देना जरूरी नहीं. किसी को जानने, उसकी सोच समझने और यह देखने में समय लग सकता है कि दोनों एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हैं या नहीं। स्लो डेटिंग में कम लोगों से बात करने, समय देने और बिना जल्दबाजी के रिश्ता समझने पर जोर होता है।
क्या फिर लौटेगी रियल लाइफ डेटिंग?
डेटिंग ऐप्स के बावजूद लोगों के मिलने की पुरानी जगहें आज भी मौजूद हैं। कॉलेज, ऑफिस, जिम, बुक्सक्लब, सोशल इवेंट और दोस्तों के जरिए होने वाली मीटिंग्स नए रिश्तों की शुरुआत बन सकती हैं।इन जगहों की खासियत यह है कि बातचीत केवल डेटिंग के इरादे से शुरू नहीं होती. पहले दोस्ती हो सकती है, बातचीत बढ़ सकती है और फिर धीरे-धीरे पसंद में बदल सकती है।शायद आने वाले समय में डेटिंग पूरी तरह ऐप्स से दूर न जाए, लेकिन उसका तरीका जरूर बदल सकता है। ज्यादा स्वाइप और ज्यादा ऑप्शन की जगह कम लेकिन अच्छे कनेक्शन को इंपॉर्टेंस मिल सकता है।
आखिरकार,एक स्वाइप यह बता सकता है कि कोई हमें पसंद आया या नहीं। लेकिन किसी के साथ बैठकर घंटों बात करना, साथ हंसना और उसके साथ सहज महसूस करना- इन चीजों को कोई ऐप तय नहीं कर सकता। प्यार शायद हमेशा से इसी तरह शुरू होता रहा है।

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