नवरात्रि में हम पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा करते हैं। भारतीय संस्कृति में देवी को 'प्रकृति' का साक्षात रूप माना गया है। ऐसे में सिर्फ पंडालों में जयकारे लगाना काफी नहीं है हमारी असली पूजा तब सार्थक होगी जब हम उनकी बनाई इस धरती को बचाएंगे। इस साल मां के नौ स्वरूपों से इंस्पिरेशन लें और अपनी लाइफस्टाइल में 9 ऐसे 'ग्रीन' बदलाव लाएं जो एन्वायरन्मेंट के साथ-साथ हमारी सेहत को भी सुधारेंगे।
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1. मां शैलपुत्री: हरियाली का संकल्प
शैलपुत्री यानी पहाड़ों की बेटी। यह स्वरूप सीधे तौर पर धरती और जंगलों से जुड़ा है।
क्या करें: बालकनी या आंगन में कम से कम एक पौधा लगाएं और उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी लें। साइंटिफिक रिसर्च बताती है कि घर में पौधे होने से इनडोर एयर क्वालिटी 25% तक सुधर जाती है और स्ट्रेस लेवल भी कम होता है।
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2. मां ब्रह्मचारिणी: 'जीरो वेस्ट' और सादगी
मां का यह रूप तपस्या और सादगी का प्रतीक है जो हमें बेवजह के दिखावे से दूर रहना सिखाता है।
क्या करें: फास्ट फैशन के इस दौर में हम जरूरत से ज्यादा चीजें खरीदते हैं। अपने वॉर्डरोब को डिक्लटर करें। जो कपड़े या जूते आप नहीं पहनते उन्हें फेंकने के बजाय दान करें। 'मिनिमलिज्म' अपनाएं ताकि लैंडफिल (कूड़े के ढेर) में जाने वाला कचरा कम हो।
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3. मां चंद्रघंटा: शोर पर लगाम
इनके मस्तक पर घंटे के आकार का चंद्रमा है जिसकी ध्वनि से शांति मिलती है।
क्या करें: त्योहार का मतलब कान फोड़ू डीजे या लाउडस्पीकर नहीं है। WHO के मुताबिक 85 डेसिबल से ज्यादा का शोर स्ट्रेस और हार्ट प्रॉब्लम बढ़ाता है. ट्रैफिक में बेवजह हॉर्न बजाने से बचें और शांति का आनंद लें।
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4. मां कुष्मांडा: एनर्जी की बचत
मान्यता है कि मां कुष्मांडा की मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड में ऊर्जा का संचार हुआ था।
क्या करें: भारत में आज भी भारी मात्रा में बिजली कोयला जलाकर बनती है जो ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है। दिन में नेचुरल लाइट का इस्तेमाल करें. कमरे से निकलते ही लाइट-पंखे बंद करने की आदत डालें। आपकी बचाई गई थोड़ी सी बिजली भी कार्बन फुटप्रिंट कम करती है।
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5. मां स्कंदमाता: बेजुबानों के लिए करुणा
यह स्वरूप मातृत्व और प्रेम का प्रतीक है। प्रकृति भी एक मां की तरह हमारा पोषण करती है।
क्या करें: अपने इकोसिस्टम का बैलेंस बनाए रखने के लिए सिर्फ इंसानों का नहीं जानवरों का भी ख्याल रखें। घर की छत पर पक्षियों के लिए पानी रखें और गली के बेसहारा जानवरों को खाना दें।
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6. मां कात्यायनी: 'प्लास्टिक रूपी महिषासुर' का वध
मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया था। आज हमारी धरती का सबसे बड़ा राक्षस 'सिंगल-यूज प्लास्टिक' है।
क्या करें: एक प्लास्टिक की बोतल को पूरी तरह डैमेज होने में 450 साल लगते हैं। इसे हमेशा के लिए अपनी जिंदगी से 'ना' कहें। बाजार जाते समय हमेशा जूट या कपड़े का थैला साथ ले जाने की आदत डालें।
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7. मां कालरात्रि: प्रदूषण रूपी अंधकार का नाश
यह रूप अज्ञानता और अंधकार को मिटाता है। आज हवा में घुला जहरीला धुआं हमारा सबसे बड़ा अंधकार है।
क्या करें: छोटी दूरी के लिए बाइक या कार निकालने के बजाय पैदल चलें या साइकिल का इस्तेमाल करें। हो सके तो ऑफिस जाने के लिए कारपूलिंग या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ऑप्शन चुनें।
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8. मां महागौरी: पानी की शुद्धता और बचत
यह रूप श्वेत और पवित्रता का प्रतीक है बिल्कुल एक निर्मल नदी की तरह।
क्या करें: क्या आप जानते हैं कि ब्रश करते समय खुला नल हर मिनट करीब 15 लीटर पानी बर्बाद करता है इसे बंद रखें। पूजा के फूल और सामग्री को नदियों या तालाबों में फेंकने के बजाय उसे गमले की मिट्टी में दबाकर खाद बनाएं।
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9. मां सिद्धिदात्री: 'रीसाइकिल' को बनाएं आदत
सिद्धिदात्री पूर्णता और संतुलन की देवी हैं। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलना ही असली जीवन है।
क्या करें: अपनी लाइफ में 'सर्कुलर इकोनॉमी' (Reduce, Reuse, Recycle) को अपनाएं। यह संकल्प लें कि एन्वायरन्मेंट बचाने की ये 9 आदतें सिर्फ नवरात्रि के 9 दिनों तक सीमित नहीं रहेंगी बल्कि हमेशा के लिए आपकी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनेंगी।

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