Last Updated:March 24, 2025, 14:14 IST
F35 Fighter Jets: इंडियन एयरफोर्स को 42 स्क्वाड्रन चाहिए, पर अभी 31 ही ऑपरेशनल हैं. भारत ने फ्रांस से 36 राफेल खरीदे हैं और एचएएल तेजस MK1A बना रहा है. अमेरिका और रूस से भी फाइटर जेट्स खरीदने पर विचार हो रहा है...और पढ़ें

ट्रंप की नीतियों की वजह से एफ-35 के भाव गिर सकते हैं.
हाइलाइट्स
भारत को 42 स्क्वाड्रन फाइटर जेट्स की जरूरत है.अमेरिका एफ-35 के दाम गिरा सकता है.भारत देसी और विदेशी फाइटर जेट्स खरीदने पर विचार कर रहा है.F35 Fighter Jets: इंडियन एयरफोर्स लड़ाकू विमानों की कमी से जूझ रही है. यह एक सच्चाई है. चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन देशों से घिरे होने की वजह से उसको फाइटर जेट्स के 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है लेकिन, मौजूदा वक्त में आईएएफ के पास केवल 31 स्क्वायड्रन ऑपरेशनल हैं. ऐसे में उसे आने वाले वक्त में तेजी से फाइटर जेट्स की खरीद करनी पड़ेगी. वैसे यह कोई आसान काम नहीं हैं. पिछले दिनों वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भी कहा था कि हम कोई एसी-फ्रीज नहीं खरीद रहे हैं कि मार्केट गए और उठा लाए. फाइटर जेट्स का चयन और उन्हें खरीदना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है.
भारत इस वक्त अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए एक साथ कई विकल्पों पर काम कर रहा है. 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद एयर फोर्स की तत्कालिक जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने फ्रांस से 36 रॉफेल फाइटर जेट्स की खरीद की. इसके दो स्क्वायड्रन तैयार किए गए. एक स्क्वायड्रन चीन और दूसरा पाकिस्तान से लगे इलाकों में तैनात किया गया है. यह समय पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स का है. राफेल 4.5 पीढ़ी के विमान हैं. भारत को इस वक्त करीब 200 फाइटर जेट्स की जरूरत है. ऐसे में वह 4.5वीं और पांचवीं दोनों पीढ़ी के विमानों को खरीदने पर विचार कर रहा है.
देसी फाइटर जेट्स पहली प्राथमिकता
भारत सरकार और सेना की पहली प्राथमिकता देसी फाइटर जेट्स खरीदने की है. भारत की पब्लिक सेक्टर कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने डीआरडीओ के साथ मिलकर तेजस MK1A फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है. ये 4.5 पीढ़ी के विमान हैं. इसके साथ ही एचएएल पांचवीं पीढ़ी का अपना लड़ाकू विमान भी डेवलप कर रहा है. इसे 2030 तक बना लिए जाने की संभावना है. एयर फोर्स ने एचएएल को 83 तेजस MK1A फाइटर जेट्स का ऑर्डर भी दे दिया है.
दूसरा विकल्प
भारत के पास दूसरा विकल्प है रूस और अमेरिका से पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को खरीदना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद F-35 विमान भारत को बेचने का ऑफर दे चुके हैं. उधर, रूस भी भारत को सुखोई-57 विमान बेचना चाहता है. भारत के पास पहले से ही सुखोई-30 का एक बड़ा बेड़ा है.
अब ताजा डेवलपमेंट यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इन दिनों दुनिया में टैरिफ वार छेड़ रखा है. इस मामले में वह अपने मित्र देशों को भी नहीं छोड़ रहे हैं. वह कनाडा, पुर्तगाल, तुर्की, जर्मनी और स्विटजरलैंड जैसे देशों को भी नहीं बकस रहे हैं. ये वे देश हैं जिन्होंने अमेरिका से एफ-35 विमानों का सौदा किया है. डिफेंस से जुड़ी खबर देने वाली वेबसाइट डिफेंस डॉट इन की एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा ने 2023 में अमेरिका से 88 एफ-35 विमानों का सौदा किया था. 2026 से इन विमानों की सप्लाई भी शुरू होने वाली है. इसी तरह पुर्तगाल ने 24, तुर्की ने 100, जर्मनी ने 35 और स्विटजरलैंड ने 36 विमानों का सौदा किया था. एफ-35 का निर्माण अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन करती है. उसका प्रोडक्शन लाइन जबर्दस्त है. उसने मार्च 2025 तक दुनिया में 1100 से अधिक एफ-35 लड़ाकू विमानों की सप्लाई कर दिया था.
टैरिफ वार और एफ-35
वेबसाइट डिफेंस डॉट इन के लिए एक लेख में कैप्टन (रिटायर) एमएस चटर्जी लिखते हैं कि ट्रंप के टैरिफ बवाल से ये देश परेशान हैं. वे जवाबी कार्रवाई के रूप में अमेरिका से एफ-35 का सौदा रद्द करने की बात कर रहे हैं. चटर्जी के मुताबिक अगर ऐसा होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ा नुकसानदेह होगा. लॉकहीड मार्टिन ने इन विमानों को एक्सपोर्ट के हिसाब से बयान है ऐसे में वे अमेरिकी एयरफोर्स के काम भी नहीं आएंगे. ऐसी स्थिति में लॉकहीड मार्टिन को इन विमानों को औने-पौने दाम पर किसी अन्य देश को बेचना पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में भारत के लिए यह एक मौका हो सकता है. क्योंकि इसमें कोई शक नहीं कि एफ-35 दुनिया के चुनिंदा सबसे बेहतरीन विमानों में शुमार है. लॉकहीड मार्टिन स्टॉक क्लियर करने के लिए काफी किफायती रेट पर सौदा कर सकती है.
First Published :
March 24, 2025, 14:14 IST