Last Updated:March 24, 2025, 15:53 IST
बाबर ने भारत में 1526 से लेकर 1530 तक राज किया. इसे छोटा शासन ही कहा जा सकता है. लेकिन उसने यहां मजबूत मुगल वंश की नींव जरूर रखी. बाबर की आत्मकथा बाबरनामा में भारत और हिंदुओं का खास जिक्र हुआ है.

पंजाब की ओर से कई छोटे-मोटे हमले करने के बाद बाबर आखिरकार 1526 में भारत में घुस ही गया. हालांकि वो यहां मुश्किल से साढ़े चार साल ही शासन कर पाया. ज्यादातर समय तो उसने लड़ने में बिताया. उसने बाबरनामा में इस देश और यहां हिंदुओं को कैसा पाया. उनके बारे में अपनी आत्मकथा बाबरनामा में क्या लिखा.
बाबर का ज्यादातर समय सैन्य अभियानों, क्षेत्रीय विस्तार और शासन स्थापित करने में बीता. वह एक मध्य एशियाई शासक था, जिसकी संस्कृति, परंपराएँ और धार्मिक विश्वास इस्लाम और तुर्क-चगताई परंपराओं से गहरे जुड़े थे.
बाबर ने अपनी जो आत्मकथा बाबरनामा लिखी, वो तब विदेशी शासक की नजर से लिखी गई. जो कुछ उसने इस देश और हिंदुओं और उनके रीतिरिवाज के बारे में कहा और लिखा, वो उद्धरण यहां सीधे बाबरनामा से लिए गए हैं
1. हिंदुओं की बहुसंख्यक होना उसके लिए नया अनुभव
बाबर लिखता है: “हिंदुस्तान में ज्यादातर लोग हिंदू हैं. यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा इनका है.”
वह भारत को एक ऐसा देश मानता था, जहां हिंदू बहुसंख्यक थे, जो उसके लिए एक नया अनुभव था.
2. मूर्तिपूजा की प्रथा
“ये लोग बहुत सारी मूर्तियों की पूजा करते हैं. उनके पास अजीब धार्मिक रिवाज हैं.”
बाबर ने हिंदू धर्म की मूर्तिपूजा को अपने इस्लामी दृष्टिकोण से देखा. इसे आश्चर्यजनक माना.
3. हिंदू योद्धाओं की बहादुरी
बाबर ने हिंदू योद्धाओं की काफी तारीफ की, उसने लिखा, “हिंदुओं में खासकर उनके योद्धाओं में गजब का साहस और जुनून है. वे युद्ध में अपनी जान की परवाह नहीं करते.” उसने ये तारीफ खानवा की लड़ाई में राजपूतों के लिये की, जिनकी वीरता ने उसे प्रभावित किया.
4. हिंदुओं की सादगीवाली जीवनशैली से प्रभावित हुआ
बाबर ने अपनी आत्मकथा में लिखा, “यहां के हिंदू लोग नंगे पांव चलते हैं. हल्के कपड़े पहनते हैं. उनका जीवन बहुत सादा है.” बाबर ने हिंदुओं की सादगी और जलवायु के अनुकूल जीवनशैली को नोट किया. उसका उल्लेख किया.
5. प्रथाएं एकदम अलग
जब बाबर हिंदुस्तान आया तो उसे ये देश कहीं बिल्कुल विचित्र लगा तो कहीं एकदम अलग सी जगह, तभी उसने बाबरनामा में ये कहा,”हिंदुस्तान के लोग और उनकी प्रथाएं हमारे देश (मध्य एशिया) से बिल्कुल अलग हैं.”
वह हिंदुओं को एक विशिष्ट सांस्कृतिक समूह के रूप में देखता था, जो उसके लिए एकदम अलग अनुभव की तरह था, क्योंकि जहां से वो आया था, वहां की परंपराएं अलग थीं और कबीलाई संस्कृति वहां ज्यादा हावी थी.
6. शिष्टाचार की कमी
उसने लिखा, “यहां के लोगों में शिष्टाचार की कमी है. उनके तौर-तरीके हमें अच्छे नहीं लगते.” ये टिप्पणी उसने उस मध्य एशियाई परिवेश से तुलना करते हुए की, जहां वो आया था और जहां शिष्टाचार के अलग मानक थे.
7. यहां के लोगों की मेहनत की तारीफ की
उसने लिखा, “हिंदुस्तान के लोग मेहनती हैं. वे खेती में बहुत मेहनत करते हैं. तरह-तरह की फसलें उगाते हैं.” बाबर ने हिंदुओं की कृषि कुशलता और मेहनत की प्रशंसा की.
8. जाति व्यवस्था के बारे में क्या कहा
बाबर ने बाबरनामा में लिखा, “यहां के हिंदुओं में कई समूह और जातियां हैं. हर समूह के अपने नियम और काम हैं.” जब वह हिंदुस्तान आया और उसने हिंदू समाज की जटिल सामाजिक संरचना को देखा, तो वह इसे लंबे समय तक समझ नहीं पाया. और शायद बाद में भी वह इसे तरीके से नहीं समझ सका.
9. युद्ध में निष्ठा
“ये लोग अपने नेता के लिए जान दे देते हैं। उनकी निष्ठा देखने लायक होती है।”
यह टिप्पणी भी राजपूत योद्धाओं के संदर्भ में है, जो अपने राजाओं के प्रति समर्पित थे।
10. हिंदुस्तान की विविधता
“हिंदुओं के पास कई भाषाएं, रंग-रूप और रिवाज हैं. यह देश बहुत विविध है.” बाबर ने हिंदुओं की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता को एक विशेषता के रूप में देखा. बाबर ने हिंदुओं की भाषाओं और विविधता का जिक्र किया, ये लिखा, “यहां कई भाषाएं बोली जाती हैं, और हर इलाके की अपनी बोली है.”
कैसे आम का मुरीद हो गया
बाबर ने भारत के फलों (जैसे आम, केला, और अनार) और स्थानीय व्यंजनों की तारीफ की है. वह लिखता है: “हिंदुस्तान के फल बहुत स्वादिष्ट हैं, खासकर आम कुछ ऐसा है जो मुझे बहुत पसंद आया. हिंदुओं सहित स्थानीय लोगों की खानपान की आदतों ने उसे प्रभावित किया.
वैसे बाबर ने हिंदू बातों को “अपनाने” से ज्यादा भारत की परिस्थितियों के अनुकूल ढलने की कोशिश की. उसने फल और भोजन, बागवानी, कृषि व्यवस्था, और कुछ हद तक जीवनशैली की सादगी को अपने जीवन में शामिल किया या उसकी सराहना की. उसके बाद के उत्तराधिकारियों ने हिंदुस्तान में हिंदुओं और यहां के रितिरिवाजों से जुड़ने की कोशिश की लेकिन बाबर ने कभी ऐसा नहीं किया. उसके लिए ये पराया ही था. वह अंत तक खुद को वहीं का मानता रहा.
Location :
Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
March 24, 2025, 15:53 IST