नीतीश की नजर अब किस वोट बैंक पर, इस बार मुस्लिम उम्मीदवार उतारेंगे या नहीं?

19 hours ago

Last Updated:April 03, 2025, 18:03 IST

Bihar Chunav : नीतीश कुमार ने वक्फ बिल का समर्थन कर 2025 के बिहार चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक को त्यागने का संकेत दिया है. बिहार की तीन से चार दर्जन सीटें मुस्लिम बहुल हैं, जहां मुस्लिम प्रत्याशी के आने के बाद ख...और पढ़ें

नीतीश की नजर अब किस वोट बैंक पर, इस बार मुस्लिम उम्मीदवार उतारेंगे या नहीं?

नीतीश कुमार का मुस्लिम वोट बैंक से मोह गया छूट?

हाइलाइट्स

नीतीश ने वक्फ बिल का समर्थन कर मुस्लिम वोट बैंक त्यागा.2025 चुनाव में जेडीयू मुस्लिम उम्मीदवार कम उतारेगी.मुस्लिम वोटर सीमांचल और मिथिलांचल में निर्णायक भूमिका में.

पटना. क्या नीतीश कुमार ने वक्फ बिल का समर्थन कर बिहार विधानसभा चुनाव में बड़ा जोखिम लिया है? क्या जेडीयू ने 2020 के विधानसभा चुनाव से सबक लेकर वक्फ संशोधन बिल का लोकसभा में समर्थन किया है? ये कुछ सवाल हैं, जिन पर राजनीति के जानकार विचार कर रहे हैं. वहीं, जेडीयू के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों ने जेडीयू को वोट किया होता, तो शायद जेडीयू वक्फ बिल पर संसद में समर्थन नहीं करती. क्या 2020 में 43 सीटें मिलना ही जेडीयू की नई रणनीति अपनाने का कारण तो नहीं? ऐसे में बड़ा सवाल क्या जेडीयू 2025 के बिहार चुनाव में उतने ही मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी, जितने 2020 के चुनाव में उतारे थे या फिर उससे भी कम?

जेडीयू की थिंक टैंक ने बिहार चुनाव 2025 के लिए रणनीति बदलने के संकेत अभी से देने शुरू कर दिए हैं. अब जेडीयू 15 प्रतिशत मुस्लिम वोट बैंक के चक्कर में 85 प्रतिशत वोट बैंक को नहीं खोना चाहती. जेडीयू ने संसद में वक्फ बिल पर समर्थन कर 14-15 प्रतिशत मुस्लिम वोट लगभग त्याग दिया है. शायद यही कारण है कि नीतीश कुमार ने 2005 के बाद पहली बार आम मुस्लिमों की इच्छा के विपरीत काम किया है. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के कोटे से ज्यादा मुस्लिम उम्मीदवार नहीं देखने को मिलेंगे.

नीतीश कुमार का मुस्लिम वोट बैंक मोह
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने 115 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे. जेडीयू उम्मीदवारों की सूची में करीब 10 प्रतिशत मुस्लिम प्रत्याशी थे. नीतीश कुमार ने पिछली बार यह संदेश देने की कोशिश की थी कि भाजपा के साथ गठबंधन के बावजूद वह अल्पसंख्यक समुदाय के हित को सुरक्षित रखेंगे. लेकिन वक्फ संशोधन बिल पर समर्थन करने के बाद जेडीयू की यह स्थिति शायद नहीं रहेगी. कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार इस बार मुस्लिम उम्मीदवारों पर पहले जैसा भरोसा नहीं करेंगे.

2020 में कितने मुस्लिमों को टिकट मिला?
2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 243 सदस्यीय विधानसभा में 122 सीटें मिली थीं, जिनमें जेडीयू की 43 सीटें थीं. पिछली बार जेडीयू ने अपने कोटे से जीतनराम मांझी की हम पार्टी को सात सीटें दी थीं. 115 सीटों पर जेडीयू ने खुद चुनाव लड़ा था, जिसमें 11 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया गया था. लेकिन एक भी मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीत नहीं सका.

बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोटर काफी अहम माने जाते हैं. बिहार की तीन से चार दर्जन सीटें मुस्लिम बहुल हैं, जहां मुस्लिम प्रत्याशी के आने के बाद खेल बिगड़ जाता है. खासकर, सीमांचल और मिथिलांचल में मु्स्लिम वोटर की पहली पसंद मुस्लिम कैंडिडेट्स ही होते हैं. क्योंकि, बिहार में 17 से 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. सीमांचल और मिथिलांचल के अलावा भी भागलपुर, सिवान, गोपालगंज और बेगूसराय में भी मु्स्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं. बिहार में 30 से 60 प्रतिशत मु्स्लिम वोटर तकरीबन डेढ़ दर्जन विधानसभा सीटों पर हैं. ऐसे में इस बार जेडीयू का वक्फ बिल का समर्थन करने ये सारे वोट आरजेडी, जनसुऱाज औऱ कांग्रेस में बंटने से इंकार नहीं किया जा सकता है.

First Published :

April 03, 2025, 17:33 IST

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नीतीश की नजर अब किस वोट बैंक पर, इस बार मुस्लिम उम्मीदवार उतारेंगे या नहीं?

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