Last Updated:May 16, 2025, 16:09 IST
Shashi Tharoor News: ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर घेरने के लिए ऑल पार्टी डेलिगेशन बना रही है. कांग्रेस से थरूर का नाम मांगा गया है, लेकिन पार्टी इसे लेकर असमंजस की स्थिति में ...और पढ़ें

शशि थरूर के स्टैंड से कांग्रेस असमंजस में है. (PTI)
हाइलाइट्स
केंद्र सरकार पाक को घेरने के लिए ऑल पार्टी डेलिगेशन बनाएगी.थरूर को डेलिगेशन में शामिल करने पर कांग्रेस में असहमति.थरूर के अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ को देखते हुए फैसला मुश्किल.नई दिल्ली. ऑपरेशन सिंदूर के बाद केंद्र सरकार पाकिस्तान को कूटनीतिक तौर पर घेरने के लिए एक ऑल पार्टी डेलिगेशन बनाने जा रही है. यह डेलिगेशन दुनिया भर के देशों में जाकर पहलगाम हमले और उसके बाद पाकिस्तान पर किए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर झूठे प्रचार की पोल खोलेगा. केंद्र सरकार ने कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष खरगे से बात कर पाकिस्तान के खिलाफ दुनिया भर में भेजे जाने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए नाम मांगे है. खबर है कि विदेश जाने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए शशि थरूर को रखे जाने के पक्ष में केंद्र सरकार है. सरकार की तरफ से थरूर को भेजे जाने की पेशकश की गई, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि सदस्यों का चयन उसका कांग्रेस अंतरिम मामला है और पार्टी का नेतृत्व तय करेगा.
असमंजस में कांग्रेस पार्टी
हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ और UN कार्यकाल को देखते हुए थरूर को न भेजने का फैसला लेना मुश्किल है. थरूर का नाम कांग्रेस सांसदों की सूची में शामिल किया जाए की नहीं, इसपर जल्द फैसला होगा. पार्टी के कुछ नेता थरूर के मोदी सरकार के समर्थन में लगातार बयान से असंतुष्ट है. पाकिस्तान के साथ तनाव के समय भी थरूर ने कांग्रेस की पार्टी लाइन से अलग बयान दिया था, जिसको लेकर बवाल हुआ. कांग्रेस के कई रणनीतिकार विदेश जाने वाले सांसदों के प्रतिनिधिमंडल में थरूर को रखे जाने के पक्ष में नहीं. इन सांसदों का तर्क है कि थरूर ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष के दौरान पार्टी लाइन से हटकर बयान दिया. यही नहीं संघर्ष विराम के बाद जब पूरी पार्टी पीएम से अमेरिका के रुख को लेकर सवाल पूछ रही थी और इंदिरा गांधी को आयरन लेडी के रूप में कांग्रेस कैंपेन चला रही थी, तब भी थरूर ने उसको कमतर करने का प्रयास किया था.
थरूर के पास अंतरराष्ट्रीय मामलों की शानदार समझ
शायद सरकार को इसकी भनक थी इसलिए खरगे के साथ बातचीत में सरकार की तरफ से थरूर को भेजे जाने की मांग की गई, जिसके बाद पार्टी ने कहा कि कांग्रेस के सदस्यों का चयन उसका अंतरिम मामला है और पार्टी का नेतृत्व तय करेगा. हालांकि थरूर के अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ और उनके UN कार्यकाल को देखते हुए उनको न भेजने का फैसला लेना मुश्किल है. जल्द होगा फैसला की थरूर का नाम कांग्रेस सांसदों की सूची में शामिल किया जाए की नहीं. पार्टी के कुछ नेता थरूर के मोदी सरकार के समर्थन में लगातार बयान से असंतुष्ट है और पाकिस्तान के साथ तनाव के समय भी उन्होंने पार्टी लाइन से अलग बयान दिया जिसको लेकर बवाल हुआ. हाल के दिनों में तहरीर कई मौकों पर पीएम के साथ गर्मजोशी से मिलते देखे गए है जिसके बाद उनके बीजेपी से नजदीकी के कयास लगाए जाते रहे हैं.
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और...
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