Last Updated:April 05, 2025, 14:50 IST
PM Modi Sri Lanka Visit: प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका यात्रा पर खूब सम्मान मिला. उनकी यात्रा का उद्देश्य श्रीलंका में चीन के प्रभाव को संतुलित करना है. श्रीलंका ने उन्हें मित्र विभूषण से सम्मानित किया और भारत ...और पढ़ें

पीएम मोदी की श्रीलंका यात्रा: चीन की चाल को मात देने की रणनीति
हाइलाइट्स
PM मोदी ने 10 साल में 4 बार श्रीलंका का दौरा किया.श्रीलंका में चीन के प्रभाव को संतुलित करना मुख्य उद्देश्य.श्रीलंका ने पीएम मोदी को मित्र विभूषण से सम्मानित किया.नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी श्रीलंका में हैं. श्रीलंका ने उन्हें खूब सम्मान दिया है. श्रीलंकाई राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने आवभगत में जरा भी कमी नहीं होने दी. श्रीलंका ने पीएम मोदी को पहले सेरेमोनियल गार्ड ऑफ ऑनर दिया, उसके बाद अपने सर्वोच्च सम्मान मित्र विभूषण से सम्मानित किया. राष्ट्रपति दिसानायके के कार्यकाल में पीएम मोदी की यह पहली श्रीलंका यात्रा है. हालांकि, पीएम मोदी इससे पहले 3 बार श्रीलंका जा चुके हैं. इस तरह 10 साल में पीएम मोदी की यह चौथी यात्रा है. अब आपके मन में सवाल होगा कि आखिर पीएम मोदी 10 साल में चार बार श्रीलंका क्यों गए?
पीएम मोदी के 10 साल में 4 बार श्रीलंका जाने की कई वजहे हैं. सबसे पहली बात कि श्रीलंका हमारा पुराना पड़ोसी और मित्र देश है. नेबरहुड फर्स्ट यानी पड़ोसी पहले भारत की नीति रही है. इसलिए हमारा आना-जाना पड़ोसियों के घर लगा रहता है. दूसरी वजह उसकी भगौलिक स्थिति और तीसरी चीन की नजर है. और यही सबसे बड़ी वजह है. पीएम मोदी ने 2015, 2017, 2019 और 2025 में श्रीलंका की चार यात्राएं कीं.
श्रीलंका भारत का निकटतम पड़ोसी है. भगौलिक स्थिति को लेकर रणनीतिक रूप से अहम भी है. हिंद महासागर का असली सिकंदर कौन होगा, इसे लेकर भारत और चीन के बीच पर्दे के पीछे जंग चल रही है. चीन समंदर में अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है. वह श्रीलंका का इस्तेमाल भी अपने फायदे के लिए करना चाहता है. ऐसे में चीन की बढ़ती मौजूदगी को बैलेंस करने की रणनीति को लेकर ही पीएम मोदी श्रीलंका गए हैं. सीधे शब्दों में कहें तो चीन की चाल को मात देने पीएम मोदी श्रीलंका गए हैं.
चीन ही है असल मकसद
बीते कुछ सालों में श्रीलंका ने चारों ओर से भारत को घेरने की एक नाकाम कोशिश की है. एक ओर उसने नेपाल को अपने कर्जजाल में फंसाया. दूसरी ओर श्रीलंका को भी संकट से उबारने का लालच दिया. अभी चीन बांग्लादेश को अपना चेला बना रहा है. पाकिस्तान तो उसका सदाबहार चेला है ही. भारत अब चीन की हर चाल से वाकिफ है. चीन ने श्रीलंका में बेल्ट एंड रोड पहल के तहत हम्बनटोटा बंदरगाह और कोलंबो पोर्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है. यह सब अपना धाक जमाने का बहाना है. 2014 में चीनी पनडुब्बियों का कोलंबो में ठहराव और 2022 में जासूसी जहाज युआन वांग 5 का आगमन भारत के लिए चिंता का कारण बना. श्रीलंका में 2022 का कर्ज संकट भी चीन के प्रभाव को बढ़ाने वाला रहा, जब उसने 99 साल के लिए हम्बनटोटा का पट्टा लिया.
क्यों अहम है मोदी का श्रीलंका दौरा
ऐसी स्थिति में पीएम मोदी का श्रीलंका दौरा अहम हो जाता है. श्रीलंका किसी तरह चीन के बहकावे में न आए और उसकी सरजमीं का इस्तेमाल भारत के खिलाफ न हो, इसके लिए चाल चलना जरूरी थी. पीएम मोदी की इस यात्रा से चीन की चाल मात खा गई. श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्वासन दिया कि उनका देश अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी तरह से नहीं होने देगा. माना जा रहा है कि यह बयान चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भारत की चिंताओं को दूर करने की कोशिश है.
क्या है असल मकसद
सूत्रों का कहना है कि चीन ने श्रीलंका को लालच देकर भारत से दूर करने की कोशिश की है. उस दूरी को पाटने के लिए ही पीएम मोदी बार-बार श्रीलंका जा रहे हैं. पीएम मोदी चाहते हैं कि श्रीलंका हमारा अपना दोस्त और अच्छा पड़ोसी बना रहे. वह दूसरा पाकिस्तान न बन जाए. इसलिए जब दिसानायके भी भारत आए थे, तो उन्होंने मोदी के सामने आश्वासन दिया था कि वह चीन को अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के खिलफ नहीं करने देंगे. अब जब पीएम मोदी इस बार भी श्रीलंका गए तो उन्होंने साफ-साफ समझा दिया कि भारत अब पहले वाला भारत नहीं है. चीन का चेला बनकर श्रीलंका का भला नहीं होगा.
कूटनीति से आगे की बात
इसलिए पीएम मोदी का बार-बार श्रीलंका जाना केवल कूटनीति नहीं, बल्कि चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति को मात देने का भी प्लान है. भारत श्रीलंका को आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक रूप से अपने साथ जोड़कर क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है. भारत अब श्रीलंका के ऊपर चीन के प्रभाव को भी खत्म करना चाहता है. यह रणनीति अब तक सफल रही है, क्योंकि श्रीलंका ने भारत को आश्वासन दिया है कि उसकी जमीन भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी.
Location :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
April 05, 2025, 14:40 IST