मेरठ हत्याकांड की आरोपी मुस्कान गर्भवती, क्या होगा केस पर असर, मिलेगी सुविधा

17 hours ago

खबरें हैं कि मेरठ में सौरभ हत्याकांड की आरोप मुस्कान की मेडिकल टेस्ट से पता चला है कि वह गर्भवती है. हालांकि इस हत्याकांड में दो हत्यारोपी हैं, एक वो खुद और दूसरा उसका साथी साहिल. इस मामले में अब तक अदालत की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है. अब ये सवाल सभी के दिमाग में है कि गर्भवती होने की खबर के बाद उसके केस पर क्या असर पड़ेगा. क्या उसे सजा से कुछ राहत मिल जाएगी या जेल में ही उसके लिए खास इंतजाम होंगे.

मुस्कान पर जिस तरह की हत्या का आरोप है. वह क्रूर हत्या की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में हत्यारोपियों को फांसी की सजा भी मिल जाती है लेकिन अभी ये केस अदालत में पहुंचा ही नहीं है. लिहाजा ये कहना मुश्किल है कि इस केस में आगे क्या मोड़ आएंगे लेकिन गर्भावस्था के कारण उसे कई तरह की राहत मिल सकती है. यहां तक कि विशेष स्थितियों में जमानत भी मिल सकती है.

क्या जमानत मिल सकती है
भारतीय कानून के तहत, गर्भवती महिलाओं को विशेष परिस्थितियों में जमानत दी जा सकती है. उदाहरण के लिए, दिल्ली और बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐसे मामलों में मानवीय आधार पर जमानत दी है. कोर्ट ने ये माना है कि जेल में बच्चे को जन्म देना मां और बच्चे दोनों के लिए अच्छा नहीं रहेगा.

यदि मुस्कान को जमानत नहीं मिलती, तो जेल प्रशासन को उसके और उसके बच्चे की देखभाल के लिए विशेष प्रबंध करने होंगे. जेल नियमों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को अलग बैरक और चिकित्सा सहायता दी जाती है.

हालांकि गर्भावस्था एक विशेष परिस्थिति है, लेकिन अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता को भी ध्यान में रखा जाता है. सौरभ हत्याकांड में मुस्कान पर संगीन आरोप हैं, जैसे हत्या और सबूत मिटाने की कोशिश, जो जमानत मिलने की संभावना को कम कर सकता है.

अस्थायी राहत मिल सकती है
हालांकि इस मामले में अभी अदालती कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, लिहाजा अदालत इस तथ्य के बाद भी अपनी कार्यवाही उसी तरह से जारी रखेगी. ये तथ्य उसकी सजा को कम करने का आधार नहीं बनता. हालांकि, अदालतें मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए गर्भवती महिलाओं को जेल में प्रसव से बचाने के लिए अस्थायी राहत देती रही हैं. लेकिन ये अस्थायी होती हैं.

केस में भी विध्न पड़ सकता है
ये भी बात सही है कि अगर मुस्कान की गर्भावस्था में पेचिदगियां पैदा हुईं तो केस की कार्यवाही में भी विध्न पड़ सकता है. लिहाजा ये कार्यवाही थोड़ा देर तक भी चल सकती है. लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह संभावना कम है कि उसकी सजा पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ेगा.

जेल में क्या हैं गर्भवती महिलाओं के विशेषाधिकार
जेल में गर्भवती महिलाओं को भारत में विशेष अधिकार और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जो उनके और उनके बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं. ये अधिकार भारतीय संविधान, राष्ट्रीय आदर्श जेल नियमावली और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत आते हैं
– उन्हें पौष्टिक भोजन दिया जाएगा और नियमित रूप से चिकित्सा देखभाल की जाएगी. ये उसका विशेषाधिकार है ताकि उसकी और उनके बच्चे की सेहत बनी रहे.
– नियमित रूप से चिकित्सा जांच और प्रसव के समय उचित देखभाल की जाएगी. प्रसव प्रसव जेल के निकट अस्पताल में सुनिश्चित किया जाता है.

जेल में अलग आवास
बच्चे के जन्म के बाद महिला और नवजात को कम से कम एक महीने तक अलग आवास और स्वच्छ देखभाल का अधिकार है ताकि संक्रमण से बचा जा सके.

जन्मप्रमाण पत्र में क्या जेल का उल्लेख होता है
यदि महिला जेल में बच्चे को जन्म देती है, तो बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र पर जन्म स्थान के रूप में जेल’ का उल्लेख नहीं होता. इससे बच्चे के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. बच्चे को जेल में जन्म लेने के कारण सामाजिक कलंक या भेदभाव का सामना नहीं करना पड़े, इसका ध्यान रखा जाता है. जन्म स्थान के रूप में उस अस्पताल या स्थान का उल्लेख किया जाता है जहां बच्चे का जन्म हुआ होता है, जैसे कि जिला अस्पताल.

स्तनपान और बच्चों की देखभाल
महिला कैदियों को अपने बच्चों को स्तनपान कराने का पूरा अधिकार है. साथ ही छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जेल में क्रेच की व्यवस्था होनी चाहिए. जेल में बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और मनोरंजन की सुविधाएं प्रदान करने का प्रावधान है ताकि उनका समुचित विकास हो सके

पुरुष कैदियों से अलग आवास
गर्भवती महिलाओं को पुरुष कैदियों से पूरी तरह अलग रखा जाता है. अगर अलग महिला जेल उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें संयुक्त जेल में भी अलग हिस्से में रखा जाता है.

क्या फांसी की सजा हो सकती है
अभी तो केस ही शुरू नहीं हुआ तो ये कैसे कहा जा सकता है कि उसको कौन सी सजा होगी. हालांकि भारतीय कानून के अनुसार, गर्भवती महिला को फांसी की सजा नहीं दी जा सकती. यह प्रावधान भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 416 और फांसी पर रोक से संबंधित न्यायिक प्रक्रियाओं में स्पष्ट है. हालांकि अगर न्यायालय को यह जानकारी मिलती है कि दोषी महिला गर्भवती है, तो वह सजा को स्थगित कर सकता है.

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