किसका पैसा, FIR क्यों नहीं? जस्टिस वर्मा मामले में उठे सवाल, BJP-कांग्रेस साथ

1 week ago

Last Updated:March 25, 2025, 10:03 IST

Justice Verma Cash Kand: दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से कथित तौर पर भारी मात्रा में कैश मिलने की खबर पर कई सवाल उठे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या न्यायपालिका में पारदर्शिता है और क्या कि...और पढ़ें

किसका पैसा, FIR क्यों नहीं? जस्टिस वर्मा मामले में उठे सवाल, BJP-कांग्रेस साथ

जस्टिस वर्मा के घर से कैश बरामद होने के बाद इस मामले में कई सवाल खड़े किए हैं.

हाइलाइट्स

जस्टिस वर्मा के घर नकदी मिलने पर सवाल उठे.बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने आलोचना की.सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए कमेटी बनाई.

बीते दिनों दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से नकदी मिली और फिर वहां संदिग्ध तरीके से आग लग गई. इस मामले ने सत्तारूढ़ बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस दोनों को एक ही प्लेटफॉर्म पर ला दिया है. आमतौर पर किसी मुद्दे पर दोनों दलों के एकजुट होने के मामले कम दिखते हैं. दोनों पार्टियां जस्टिस वर्मा की आलोचना कर रही हैं और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अभियान चल रहा है. लोग जवाब मांग रहे हैं. इस घटना से जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम व्यवस्था पर भी एक बार फिर बहस शुरू हो गई है. बड़ा सवाल यह है कि अगर आम आदमी के पास इतना पैसा मिलता, तो तुरंत एफआईआर और आयकर छापे पड़ते. ऐसे में सवाल है कि क्या भारतीय कानून जजों को छूट एफआईआर से छूट देता है? कुछ और भी अनसुलझे सवाल हैं. यह पैसा किसका था? FIR या आयकर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या आग लगना संयोग था या सबूत मिटाने की कोशिश थी?

पुलिस जांच
आग से बचे नकदी के अवशेष, उसकी मात्रा या फॉरेंसिक जांच के बारे में क्या पता है? जवाब है- लगभग कुछ भी नहीं. न तो FIR दर्ज हुई, न पुलिस ने डायरी में लिखा कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी या साजिश थी. जस्टिस वर्मा ने कहा कि उन्हें पैसे की जानकारी नहीं थी, लेकिन पुलिस ने अभी तक यह नहीं पता लगाया कि पैसा किसका था. उधर, सोशल मीडिया पर अफवाहें, तस्वीरें और वीडियो की भरमार है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की कमेटी बनाई. रिपोर्ट आने तक जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से हटाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया है.

न्यूज18 ने रिटायर्ड जजों, आयकर और प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों और इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ लोगों से बात की. सबका मानना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, खासकर उनके लिए जो इसे लागू करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील बिकाश भट्टाचार्य ने कहा, “जज जिम्मेदारी से बच नहीं सकते. उनके घर पैसा कैसे पहुंचा, इसका जवाब चाहिए. नैतिकता से ऊपर कोई बहाना नहीं चलता. उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था. आम आदमी के लिए ऐसा मामला भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और आयकर कानूनों के तहत तुरंत जांच का कारण बनता है. आग से साजिश या आगजनी के सवाल उठते हैं. CBI से पूरी जांच होनी चाहिए.”

क्या जज की जांच हो सकती है?
जस्टिस वर्मा के घर मिला कथित अज्ञात पैसा कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है. जज ने सफाई दी है और जांच चल रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. एक रिटायर्ड जज ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह गलत आचरण है. आग से सबूत नहीं मिट सकते. FIR जरूरी है. कोई भी खुद को कानून से छूट नहीं दे सकता. अज्ञात पैसा मिलना अपराध का संकेत है. पुलिस को मालिक, कब्जा और जिम्मेदारी जांचनी चाहिए. अगर पैसा गलत लगता है, तो पुलिस और आयकर विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?”

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने CBI जांच की मांग की. उन्होंने कहा, “कुछ गड़बड़ है. जो दिख रहा है, वह पूरा सच नहीं. क्या कोई बलि का बकरा बना? कॉलेजियम व्यवस्था ढाल नहीं बन सकती. पारदर्शी जांच से ही भरोसा बहाल होगा.”

इस घटना ने कॉलेजियम व्यवस्था और जजों की जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है. पटना हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एल नरसिम्हा रेड्डी ने कहा, “अगर NJAC (नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमिशन) लागू होता, तो जवाबदेही सुनिश्चित होती. लेकिन उसे रद्द कर दिया गया. अगर वह व्यवस्था होती, तो यह मामला पारदर्शी तरीके से निपटता. अस्थायी कदम न्यायपालिका की साख को ठीक नहीं करेंगे.” यह मामला अब भारतीय न्याय व्यवस्था की परीक्षा है. क्या कानून सबके लिए बराबर रहेगा, या रसूख वालों को बचाने की परंपरा बनी रहेगी?

First Published :

March 25, 2025, 10:03 IST

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