Last Updated:August 01, 2025, 12:09 IST
MiG 21 & India-America Diplomacy: भारत के हितों से जुड़ी हर बात पर नाक सिकोड़ने की आदत अमेरिका को काफी भारी पड़ गई. दरअसल, अमेरिका को इस बात का अहसास हुआ, तब भारत दो टूक जवाब देते हुए आगे बढ़़ गया. क्या है यह ...और पढ़ें

हाइलाइट्स
मिग-21 सुपरसोनिक फाइटर जेट से जुड़ी है पूरी कहानी.अमेरिका ने F-104 भारत को देने में की थी आनाकानी.सोवियत संघ से डील का पता चलते ही पलटना चाहा पासा.MIG-21 Ka Safarnama: अब हम आगे बढ़ चुके है… भारत से इस जवाब की उम्मीद अमेरिका ने कभी नहीं की थी. भारत के इस करारे जवाब ने भारत स्थित अमेरिकी दूतावास से लेकर वाशिंगटन के व्हाइट हाउस तक खलबली मचा दी थी. दरअसल, इस मामले की असल शुरूआत 1962 के भारत-चीन युद्ध खत्म होने के साथ हो गई थी. इस युद्ध के ठीक बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को F-104 स्टारफाइटर एयरक्राफ्ट दिए थे. अमेरिका से मिली इस ताकत के बाद पाकिस्तान ने इतराना शुरू कर दिया था. वहीं आसमान में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए भारत ने भी अमेरिका से F-104 स्टारफाइटर एयरक्राफ्ट से डील करनी चाही. लेकिन, पाकिस्तान प्रेम डूबे में डूबे अमेरिका ने इस डील को लेकर आनकानी करना शुरू कर दिया.
अमेरिका के इरादों को भांपने के बाद भारत ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए और तब के सोवियत संघ (आज का रूस) के साथ मिग-21 को लेकर बातचीत शुरू कर दी. इस डील की खबर ने पेंटागन से लेकर व्हाइट हाउस तक की बेचैनी बढ़ा दी. अमेरिका ने भारत को सोवियत संघ के करीब जाने से रोकने के लिए कई कूटनीतिक प्रयास किए. भारत में अमेरिकी दूतावास और वाशिंगटन में विदेश विभाग के अधिकारियों ने व्हाइट हाउस को सुझाव दिया कि भारत को F-104 विमान बेचे जाएं, ताकि वह सोवियत हथियारों पर निर्भर न हो सके. उन्हें डर था कि अगर भारत ने सोवियत संघ से हथियार खरीदे, तो सोवियत तकनीशियन और सलाहकार को भारतीय सैन्य बलों में इंट्री मिल जाएगी.
भारत को मनाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की पेशकश
उस समय के अमेरिकी राजदूत जॉन केनेथ गैलब्रेथ ने कहा था कि अगर भारत ने मिग-21 जैसे सोवियत विमान खरीदे, तो इसके साथ आने वाले सोवियत ट्रेनर और तकनीशियन की नजदीकियां भारतीय सैन्य अधिकारियों के साथ बढ़ जाएंगी. अमेरिकी विदेश विभाग के दस्तावेजों में भी इस बात का उल्लेख किया गया कि अगर अमेरिका ने भारत को पर्याप्त समर्थन नहीं दिया, तो भारत सोवियत संघ की ओर रुख करेगा. गैलब्रेथ ने एक तार में लिख कर कहा था कि सोवियत हथियारों की खरीद से भारतीय सेना में सोवियत संघ का प्रभाव काफी बढ़ बढ़ेगा. सितंबर 1962 में, अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू मिग सौदे को लेकर अनिच्छुक थे.
हालांकि, लंदन में पत्रकारों से बातचीत में नेहरू ने स्वीकार किया कि मिग सौदे पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी. दूसरी ओर, सोवियत संघ को भी भारत को मिग-21 की आपूर्ति करने में कई संदेह थे. उनके सामने तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां थीं. सोवियत अधिकारियों को लगता था कि भारत के पास सुपरसोनिक फाइटर प्लेन के निर्माण की क्षमता सीमित है. इसके अलावा, कम्युनिस्ट चीन ने भारत को मिग-21 बनाने की सुविधा देने के सोवियत प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया था. अमेरिका ने भारत को सोवियत प्रस्ताव ठुकराने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश भी की. इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने भारत को नौ सी-130 परिवहन विमान रुपये में बेचने की मंजूरी भी दी थी.
आखिकार भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया मिग-21
हालांकि, ये सभी प्रयास असफल रहे. भारत ने न केवल मिग-21 को अपनी वायुसेना में शामिल किया, बल्कि महाराष्ट्र के नासिक के पास ओजार और ओडिशा के कोरापुट में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की सुविधाओं में इसका बड़े पैमाने पर निर्माण भी शुरू किया. मिग-21 ने भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ाया और यह विमान दशकों तक उसकी रीढ़ बना रहा. इस सौदे ने भारत और सोवियत संघ के बीच सैन्य सहयोग को और मजबूत किया, जिससे अमेरिका की चिंताएं सही साबित हुईं. आपको बता दें कि उस समय वैश्विक शक्तियों के बीच भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार था. अमेरिका और सोवियत संघ, दोनों भारत को अपने पक्ष में लाना चाहते थे.
जहां अमेरिका ने कूटनीतिक दबाव और आकर्षक प्रस्तावों के जरिए भारत को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की, वहीं सोवियत संघ ने मिग-21 जैसे उन्नत फाइटर जेट उपलब्ध कराकर भारत का भरोसा जीता था. इस सौदे ने न केवल भारतीय वायुसेना को मजबूत किया, बल्कि भारत-सोवियत संबंधों को भी बेहद प्रभावी बनाया.
Anoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to ...और पढ़ें
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